अरुणाचल में चीन के साथ झड़प पर सरकार सच छिपा रही है, देश को पूरी जानकारी दी जाए: खरगे
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के साथ भारतीय सैनिकों की झड़प की जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें देश को गुमराह करने के बजाय संसद और जनता को पूरी सच्चाई बतानी चाहिए। मिस्टर खरगे ने शुक्रवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के साथ लगातार होने वाली झड़पों की पुष्टि की है। उन्होंने सवाल किया कि क्या डोकलाम और गलवान के बाद यह एक और गंभीर झड़प है? उनका यह भी कहना था कि अगस्त में ताकसिंह के पास चीनी घुसपैठ की खबरें आई थीं और वाचा-दमई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत के 47 दिन बाद भी झड़पें जारी रहने की सूचनाएं हैं। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है और इस मामले में देश को अंधेरे में नहीं रखा जाना चाहिए। सरकार को बताना चाहिए कि क्या इस इलाके में भारत की गश्त करने की पहुंच प्रभावित हुई है।
मिस्टर खरगे ने प्रधानमंत्री से चीन को बार-बार क्लीन चिट देना बंद करने और देश के सामने स्थिति स्पष्ट करने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही जरूरी है, न कि राजनयिक मुलाकातें और गले मिलना। चीन पर आर्थिक निर्भरता के संबंध में उन्होंने कहा कि गलवान में 20 भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 से चीन से आयात में 102 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 112.16 अरब डॉलर हो गया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण स्वीकार कर चुकी हैं कि चीन भारतीय निर्यात में बाधाएं डालता है। चीन से जुड़ी पूंजी निवेश पर प्रतिबंधों में ढील और योग्य चीनी कंपनियों को उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) देने पर विचार किए जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल किया कि क्या अब 'मेक इन इंडिया', 'इंपोर्ट फ्रॉम चाइना' बन गया है?
मिस्टर खरगे ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कम से कम 23 मुलाकातें और बातचीत हुई हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की भागीदारी के साथ विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर 25 दौर की वार्ता हुई है और सीमा मामलों पर परामर्श व समन्वय के लिए कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की 36 बैठकें हो चुकी हैं। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) और ब्रिक्स शिखर सम्मेलनों में भी दोनों पक्षों के बीच संपर्क हुआ है। इन मुलाकातों के क्या ठोस परिणाम निकले और क्या मई 2020 से पहले गश्त करने की पहुंच पूरी तरह से बहाल हो गई है? हमें सशस्त्र बलों पर पूरा भरोसा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में जवाबदेही भी जरूरी है। प्रधानमंत्री को विपक्ष पर हमले करने के बजाय संसद और देश की जनता को पूरी स्थिति से अवगत कराना चाहिए।"