मुल्जिमों की फांसी की सजा बरकरार रखने की अपील खारिज
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पटना : नई दिल्ली7, जनवरी (एबीएन / एजेंसी) बिहार की राजधानी पटना के प्रसिद्ध गांधी मैदान में हुए बम धमाके के मामले में पटना हाई कोर्ट के दोषियों को उम्रकैद और तीस साल की सजा सुनाए जाने के फैसले के खिलाफ दोषियों और अपीलार्थी की ओर से दायर अपीलों को सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने खारिज कर दिया। एक ओर जहां दोषियों ने हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाने वाले सेशन अदालत के फैसले को बरकरार रखने की अदालत से अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की दो सदस्यीय पीठ के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह ने पक्षों के तर्कों की सुनवाई के बाद पटना हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली सभी अपीलों को खारिज कर दिया। दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि वे हाई कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं, हालांकि एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया राजा ठाकुरे ने अदालत को बताया कि दोषियों को सेशन अदालत ने आतंकवाद जैसे गंभीर मामले में फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे पटना हाई कोर्ट ने तीस साल में बदल दिया था। राजा ठाकुरे ने अदालत को आगे बताया कि दोषियों ने पटना और बोध गया दोनों जगहों पर बम धमाके किए थे, इसलिए दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, जमीयत उलेमा महाराष्ट्र (अरशद मदनी) कानूनी सहायता समिति की ओर से दोषियों की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अन्शुमान ने अदालत को बताया कि सेशन अदालत और पटना हाई कोर्ट ने दोषियों को बहुत कमजोर साक्ष्यों के आधार पर सजा सुनाई है, जिस पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। उन्होंने अदालत को आगे बताया कि केवल इकबालिया बयान के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई गई, दोषियों के पास से इस्लामिक साहित्य और कुछ विवादित दस्तावेजों के अलावा कुछ भी बरामद नहीं किया गया था। पक्षों के तर्कों की सुनवाई के बाद जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा कि वे दोषियों और अपीलार्थी की ओर से दायर अपीलों पर नोटिस जारी किए बिना उन्हें खारिज करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले छह महीनों के दौरान इस मामले में पांच बार सुनवाई की और आज आखिरकार सभी अपीलों को खारिज कर दिया। यह स्पष्ट है कि पिछले साल 11 सितंबर को पटना हाई कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ ने निचली अदालत से फांसी की सजा पाने वाले चार दोषियों को फांसी दिए जाने वाले फैसले को बदलकर दोषियों को तीस साल की सजा सुनाई थी। पटना हाई कोर्ट ने दोषियों हैदर अली आलम अंसारी, मुजीबुल्लाह जाबिर अंसारी, नौमान सुल्तान अंसारी और इम्तियाज अंसारी कमालुद्दीन की फांसी की सजा को तीस साल में बदल दिया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिस पर आज सुनवाई हुई। दोषियों की ओर से दायर याचिका को अधिवक्ता अरीफ अली, अधिवक्ता मुजाहिद अहमद, अधिवक्ता वासिफ रहमान खान ने वरिष्ठ अधिवक्ता के परामर्श से तैयार की थी, जिसे अधिवक्ता आंन रिकॉर्ड चंद कुरैशी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया था। यह स्पष्ट है कि 23 अक्टूबर 2013 को पटना के प्रसिद्ध ऐतिहासिक गांधी मैदान में बम धमाका हुआ था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक जनसभा से संबोधित करने वाले थे, इस धमाके में 6 लोग मारे गए और 90 लोग घायल हुए थे। बम धमाकों की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए को सौंपी गई थी, जिसने बिहार, झारखंड और आसपास के अन्य राज्यों से 10 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था और उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 326, 212, 121(ए), 120(बी), 34, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, 5 और अवैध गतिविधियों की रोकथाम अधिनियम की धारा 16, 18, 20 के तहत मामला दर्ज किया था।