दारुल उलूम इस्लामिया अकाबिरीन अमारत-ए-शरईया के सपनों की खूबसूरत व्याख्या है : मुफ्ती मुहम्मद सईदुर्रहमान कासमी
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हाफ़िज़-ए-क़ुरआन के साथ-साथ आमिल-ए-क़ुरआन भी बनें : सेक्रेटरी दारुल उलूम इस्लामिया पटना : बिहार के प्रसिद्ध और लोकप्रिय शैक्षणिक संस्थान दारुल उलूम इस्लामिया अमारत-ए-शरईया फुलवारी शरीफ में अल्लाह तआला के फजल और करम से कुरआन की हिफ्ज की पूर्ति के अवसर पर एक रूहानी दुआ महफिल आयोजित हुई। इस बारकती महफिल में अमारत-ए-शरईया के अकाबिरीन के अलावा उलमा-ए-कराम, असातिज-ए-कराम, हाफिज-ए-कुरआन, तालिब-ए-इल्म, अभिभावक और अहल-ए-इलाके की बड़ी संख्या ने भाग लिया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अमारत-ए-शरईया के नाजिम मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सईदुर्रहमान कासमी ने हाफिज-ए-कुरआन की अजमत और फजीलत पर रोशनी डाली और कहा कि कुरआन की हिफ्ज एक बड़ा सौभाग्य है जो अल्लाह तआला अपने खास बंदों को अता फरमाता है। उन्होंने अभिभावकों की कुर्बानियों और असातिज की मेहनत को भी सलाम पेश किया। साथ ही मासिक इम्तिहान में पोजीशन के साथ कामयाब होने वाले तालिब-ए-इल्म को इनाम से नवाजा और सभी तालिब-ए-इल्म को नसीहत करते हुए आप ने फरमाया कि दारुल उलूम सिर्फ एक मदरसा नहीं है, बल्कि यह आप तालिब-ए-इल्म का तालीमी घर है और तालिब-ए-इल्म इसे अपना घर ही समझें, यह आम इदारा नहीं बल्कि अमारत-ए-शरईया का मदरसा है और बिहार, ओडिशा और झारखंड का दारुल उलूम है। उन्होंने आगे कहा कि यह दारुल उलूम इन्शा अल्लाह एक दिन दारुल उलूम देवबंद जैसा बनेगा, जिसका ख्वाब हमारे बुजुर्गों ने देखा था और तालीमी नज़रिए से यह आज भी दारुल उलूम देवबंद जैसा ही है। दुआ महफिल में शामिल दारुल उलूम इस्लामिया के सेक्रेटरी मुफ्ती वासी अहमद कासमी साहब, नायब काजी शरई अमारत-ए-शरईया ने कहा कि अल्लाह से दुआ है कि आप हामिल-ए-कुरआन के साथ-साथ आमिल-ए-कुरआन भी बनें, दारुल उलूम इस्लामिया का मानक ऊंचा है, इन्शा अल्लाह निर्माण का मसला भी हल होगा। काजी शरई अमारत-ए-शरईया हजरत मौलाना काजी अन्जार आलम साहब कासमी ने तालिब-ए-इल्म को नसीहत करते हुए कहा कि आप अपनी मेहनत को इस तरह जारी रखें कि आप भी कल को काजी मुजाहिदुल इस्लाम कासमी और हमारे अमीर-ए-शरईया की तरह बन सकें। मुफ्ती मुन्तज़ा अल्लाह साहब कासमी (शेखुल हदीस और सदर-ए-मुदर्रिसीन दारुल उलूम इस्लामिया), मुफ्ती शकील अहमद कासमी (नायब शेखुल हदीस) और मुफ्ती याह्या गनी साहब ने तालिब-ए-इल्म के बीच इल्म और अमल, खुलूस और लिल्लाहیت, हिफ्ज-ए-कुरआन और तहफ्फुज-ए-कुरआन पर गुफ्तगू फरमाई और कीमती नसीहतों से नवाजा। मौलाना गौहर इमाम इमाम और खतीब शाही संगी मस्जिद ने कुरआन की फजीलत पर खिताब करते हुए कहा कि दारुल उलूम इस्लामिया बिहार, ओडिशा और झारखंड अल्लाह तआला की बड़ी नेमत है। इस अवसर पर दारुल उलूम इस्लामिया के अन्य असातिज़ मुफ्ती नीरुल इस्लाम, मुफ्ती तबरेज, मुफ्ती तारिक सईद, मुफ्ती मुशीर आलम, कारी अबरार और कारी कौसर साहब मौजूद थे, साथ ही मौलाना अबुल कलाम शम्सी मुआविन नाजिम अमारत-ए-शरईया, मुफ्ती काजी सुहैल अख्तर कासमी नायब काजी शरई अमारत-ए-शरईया, मौलाना साबिर हुसैन साहब, मुफ्ती मुहम्मद शारिक रहमानी, मुफ्ती अकील अख्तर कासमी और मुफ्ती अनस जफर कासमी और मौलाना मसरूर आलम मदरसा बोर्ड के अलावा अन्य उलमा, इमाम और दानिश्वरों ने विशेष रूप से भाग लिया। हाजिरीन ने असातिज-ए-कराम और दारुल उलूम इस्लामिया के जिम्मेदारों की शब-ए-रोज मेहनत, कुर्बानी और मुखलिसाना खिदमात को सलाम पेश करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया। दारुल उलूम इस्लामिया की तालीमी और तामीरी तरक्की, हाफिज-ए-कुरआन की इल्मी और अमली कामयाबी, उनके वालिदैन और असातिज के लिए अज्र-ए-आजम, और मुल्क और मिल्लत के अमन और इस्तिकलाल के लिए विशेष रूप से नाजिम अमारत-ए-शरईया ने दुआ फरमाई, जिस पर महफिल का अन्त हुआ।