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बिना किसी वजह के मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर न करें: निशांत
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बिना किसी वजह के मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर न करें: निशांत

Awaz E Bihar•11 जुलाई 2026 को 07:20 pm बजे•10 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

पटना 11, जुलाई (एबीएन) राज्य में सरकारी चिकित्सा सेवाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों के लिए रेफरल प्रणाली को मजबूत करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह पहल सात निश्चय -3 के तहत "सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन" के संकल्प को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मरीजों को उनके निकटतम सरकारी चिकित्सा संस्थानों में मानक उपचार तक पहुंच प्राप्त हो और अनावश्यक रेफरल को रोका जा सके।

समीक्षा बैठकों के दौरान, स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि बिना किसी कारण के मरीजों को उच्च अस्पतालों में रेफर नहीं किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार जिला अस्पतालों और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध संसाधनों, विशेषज्ञ डॉक्टरों और आधुनिक सुविधाओं का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि जनता को अपने जिलों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतर पहुंच प्राप्त हो सके। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देश इन दिशा-निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री कुमार रवि द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी सिविल सर्जनों पर यह आवश्यक है कि वे यह सुनिश्चित करें कि मरीजों को स्थानीय स्तर पर सर्वोत्तम चिकित्सा देखभाल प्राप्त हो और केवल आवश्यकता पड़ने पर ही उन्हें बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाए।

इस व्यवस्था के तहत, ओपीडी, आईपीडी, और दुर्घटना और आपातकालीन में आने वाले सभी मरीजों के उपचार की पूरी प्रक्रिया को भाव्या (बिहार हेल्थ एप्लिकेशन विजनरी योजना फॉर ऑल) पोर्टल के माध्यम से डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाएगा। मरीज का पंजीकरण, चिकित्सा परामर्श, परीक्षण, दवाएं, रेफरल और उपचार से संबंधित सभी विवरण भाव्या पोर्टल पर उपलब्ध होंगे। भर्ती मरीजों का एबीएचए आईडी बनाकर उनका इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ईएचआर) तैयार किया जाएगा, जिससे भविष्य के उपचार को और अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

दिशा-निर्देशों में सभी जिला अस्पतालों में सात दिनों के भीतर आईसीयू और 24x7 आपातकालीन सेवाओं को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ के भाव्या पोर्टल पर पंजीकरण, ड्यूटी रोस्टरों की ऑनलाइन एंट्री, और सभी उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के बारे में नवीनतम जानकारी दर्ज करने को आवश्यक बताया गया है।

इसके साथ ही, किसी मरीज को रेफर करने से पहले, संबंधित डॉक्टर को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवश्यक चिकित्सा सुविधा इस संस्थान में उपलब्ध नहीं है। प्रत्येक रेफरल के लिए स्पष्ट कारण अनिवार्य होगा, और मरीज के पेशेंट जर्नी को भाव्या पोर्टल पर पूरी तरह से अपडेट करते हुए मरीज या उनके परिवार को कंप्यूटरीकृत कॉपी प्रदान की जाएगी। नाजुक मरीजों को रेफर करने से पहले उन्हें स्थिर करने और उन्हें सरकारी एएलएसए/बीएलएसए एम्बुलेंस में भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।

रेफरल प्रणाली की निगरानी के लिए, प्रत्येक जिले में एक जिला स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता जिला अधिकारी करता है। यह समिति रेफरल मामलों का नियमित रूप से समीक्षा करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि अनावश्यक रेफरल को रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी को भी नामित किया गया है, जो सभी जिलों के साथ नियमित रूप से समीक्षा करेंगे और प्रणाली की निरंतर निगरानी करेंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में इन दिशा-निर्देशों पर प्रभावी कार्रवाई से मरीजों को अपने निकटतम सरकारी अस्पतालों में बेहतर और समय पर उपचार की सुविधा मिलेगी, सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की कार्यक्षमता में वृद्धि होगी और राज्य की रेफरल प्रणाली को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत बनाया जाएगा।
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