बिहार विधान सभा में 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत, विकास दर राष्ट्रीय औसत से 3.3 प्रतिशत अधिक
Awaz E Bihar••1 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
बिहार विधानसभा में सोमवार को 2026 के बजट सत्र के पहले दिन वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार सरकार की ओर से वर्ष 2025-26 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि बिहार की विकास दर राष्ट्रीय औसत से 3.3 प्रतिशत अधिक है, जो राज्य की तेजी से आर्थिक विकास को दर्शाता है। आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य पांच साल के भीतर बिहार को एक विकसित राज्य बनाना है। उन्होंने कहा कि 2024-25 में प्रति व्यक्ति आय बढ़कर 76,490 रुपये हो गई है। इस अवसर पर वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद किशोर भी मौजूद थे। वित्त मंत्री ने कहा कि बिहार की विकास दर देश के अन्य राज्यों से अधिक है और तमिलनाडु के बाद बिहार में सबसे अधिक विकास दर है। उन्होंने कहा कि अपने पहले 10 सालों के दौरान सरकार ने राज्य की मूलभूत आवश्यकताओं पर ध्यान केंद्रित किया, पूरे बिहार में बिजली, पानी और सड़कों का एक व्यापक नेटवर्क विकसित किया। अब आगामी पांच सालों में सरकार उद्योगीकरण पर विशेष जोर देगी, जिससे प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो जाएगी। बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आगामी पांच सालों में बिहार को एक विकसित राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सरकार "समृद्ध बिहार" के लक्ष्य की ओर तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास का यह दृष्टिकोण आगामी बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद किशोर ने बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार बिहार की कुल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्ष 2024-25 के त्वरित अनुमानों में 2011-12 की स्थिर कीमतों पर 8.6 प्रतिशत और वर्तमान कीमतों पर 13.1 प्रतिशत है। इस अवधि के दौरान जीएसडीपी बढ़कर क्रमशः 531,372 करोड़ और 991,997 करोड़ हो गई। उन्होंने कहा कि वर्तमान कीमतों पर बिहार की विकास दर राष्ट्रीय स्तर पर 9.8 प्रतिशत के मुकाबले 13.1 प्रतिशत है, अर्थात बिहार राष्ट्रीय औसत से 3.3 प्रतिशत बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। आनंद किशोर ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्तमान कीमतों पर बिहार की प्रति व्यक्ति कुल राज्य घरेलू उत्पाद 2020-21 में 46,412 रुपये से बढ़कर 2024-25 में 76,490 रुपये हो गई है। 2011-12 में स्थिर कीमतों पर यह संख्या 30,159 रुपये से बढ़कर 40,973 रुपये हो गई है। यह राज्य की अर्थव्यवस्था में निरंतर सुधार की ओर संकेत करता है। राज्य सरकार की आय संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कर संग्रह जो 2020-21 वित्त वर्ष में 1.28 लाख करोड़ था, 2024-25 में बढ़कर 2.18 लाख करोड़ हो गया है। कुल राजस्व में कर संग्रह का हिस्सा 70 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत हो गया है, जबकि राजस्व और अनुदान में अनुदान का हिस्सा कम हुआ है। कुल राज्य व्यय में योजना व्यय का हिस्सा 2020-21 में 38.3 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 39.9 प्रतिशत हो गया है। स्थापना और व्यय का हिस्सा 61.7 प्रतिशत से कम होकर 60.1 प्रतिशत हो गया है। यह प्रवृत्ति कल्याणकारी और विकास पर आधारित व्यय पर राज्य सरकार की बढ़ती ध्यान केंद्रित करने की ओर संकेत करता है। विकास व्यय 2020-21 में 1,12,122 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 1,89,892 करोड़ हो गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार के बजट का लगभग दो तिहाई हिस्सा विकास और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है।