सर्दी की लहर से बचाव के लिए अलाव के इंतजामों को सुनिश्चित कराएं : अधिकारी
Awaz E Bihar••0 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
पटना (एबीएन) जिलाधिकारी डॉ. त्याग राजन एसएम ने सभी अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार अपर समाहर्ता एवं अंचल पदाधिकारी को संभावित शीत लहर एवं पाला से बचाव हेतु सरकार द्वारा अनुशंसित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि दिसंबर से जनवरी के बीच पटना जिले में सर्दी की गंभीरता भीषण एवं भयानक शीत लहर में बदल जाती है. इस वर्ष सर्दियों की शुरुआत के साथ, तापमान गिर रहा है और भविष्य में शीत लहर की तीव्रता बढ़ने की उम्मीद है। शहरी, अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब, निराश्रित और विस्थापित लोग शीत लहर से विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। शीत लहर से प्रभावित आम लोगों विशेषकर गरीबों एवं निराश्रितों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जिलाधिकारी ने समाचार पत्रों एवं अन्य मीडिया में प्रकाशित शीतलहर की खबरों पर अधिकारियों को नियमानुसार त्वरित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. जिलाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि गरीबों एवं निराश्रित लोगों को शीतलहर से बचाने के लिए मुख्यालय स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक सभी शहरी एवं अर्ध शहरी क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार अलाव की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें. ऐसे स्थानों पर जहां बड़ी संख्या में गरीब और बेसहारा लोग रहते हैं या एकत्र होते हैं, जैसे धर्मशाला, अस्पताल परिसर, रेन बसेरा, यात्री निवास, रिक्शा और टीम स्टैंड, चौराहा, रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन आदि पर अलाव जलाए जाने चाहिए। करने एवं पर्यवेक्षण हेतु प्रभारी नियुक्त किये गये हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि सभी अनुमंडल भूमि सुधार पदाधिकारियों की यह जिम्मेवारी है कि चयनित स्थानों पर अलाव की समुचित व्यवस्था हो और इस राहत का लाभ गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को मिले. वे समय-समय पर अलाव स्थलों का स्वयं निरीक्षण एवं सघन निगरानी करेंगे। राजधानी पटना में ठंड बढ़ रही है और न्यूनतम तापमान गिर रहा है. जरूरतमंदों को कोई कठिनाई न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी प्रशासनिक मशीनरी सतर्क, तत्पर और प्रतिबद्ध है। जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारी, भूमि सुधार उपसमाहर्ता एवं अंचलाधिकारियों को बेहतर तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है. कम्बल वितरण, पर्याप्त स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएँ, फसलों की सुरक्षा एवं पशुधन की सुरक्षा सहित पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें। संभावित शीत लहर एवं पाला से लोगों को बचाने के लिए जनता से यह भी अनुरोध किया जाता है कि शीत लहर एवं पाला की स्थिति में आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी "क्या करें और क्या न करें" का पालन करें। आपातकालीन स्थिति में जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र, पटना 0612-2210118 आपदा प्रबंधन विभाग के टोल-फ्री नंबर 1070, या स्वास्थ्य विभाग के हेल्पलाइन नंबर 104 पर संपर्क करें। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि शीतलहर की स्थिति में सभी अंचल अधिकारी निर्धारित प्रारूप में दैनिक रिपोर्ट जमा करना सुनिश्चित करेंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि रिक्शा चालकों, दिहाड़ी मजदूरों, निराश्रितों, बेघरों एवं ऐसे ही गरीब एवं निराश्रित व्यक्तियों के लिए पटना नगर निगम द्वारा शहरी क्षेत्रों में रैन बसेरा की स्थापना की गयी है. फिलहाल, बेघरों के लिए पटना नगर निगम ने तीन तरह के कुल 26 रैन बसेरे स्थापित किये हैं. स्थायी और अस्थायी रैन बसेरों के अलावा जर्मन हैंगर तकनीक से भी रैन बसेरे बनाये गये हैं. इसमें 12 जर्मन हैंगर, छह स्थायी और आठ अस्थायी आश्रय स्थल शामिल हैं। इन रैन बसेरों में कुल 988 बिस्तर हैं। ये सभी रैन बसेरे चौराहों, रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों जैसे सार्वजनिक स्थानों के पास स्थित हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि आवश्यकतानुसार रैन बसेरों एवं बिस्तरों की संख्या बढ़ाई जायेगी। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि जहां रैन बसेरे उपलब्ध नहीं हैं, वहां पॉलिथीन शीट, टेंट और तिरपाल शीट का उपयोग करके अस्थायी आश्रय स्थल बनाए जाएं। रैन बसेरों एवं अस्थाई आश्रय स्थलों में पर्याप्त संख्या में कम्बल रखे जाएं। इन आश्रय स्थलों और अस्थायी आश्रय स्थलों में सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। आश्रय स्थलों की जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि लोगों को पूरी जानकारी रहे और वे सरकार की व्यवस्थाओं का पूरा लाभ उठा सकें। इन व्यवस्थाओं की निगरानी एवं पर्यवेक्षण के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया जाए। अपने स्तर से की गयी व्यवस्था की दैनिक रिपोर्ट जिला आपदा प्रबंधन शाखा, पटना को उपलब्ध करायी जाये. जिलाधिकारी ने सहायक निदेशक, जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग, पटना को शीत लहर के दौरान कंबल वितरण हेतु आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है. सिविल सर्जन, पटना को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया है कि शीत लहर/ठंढ के दौरान बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित सभी लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों।