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भारत की कमजोरी नहीं शांति की नीति, आतंकवाद पर उठाएंगे जरूरी कदम: राजनाथ
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भारत की कमजोरी नहीं शांति की नीति, आतंकवाद पर उठाएंगे जरूरी कदम: राजनाथ

Awaz E Bihar•27 सितंबर 2026 को 04:33 pm बजे•32 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत शांति में विश्वास रखता है और किसी भी देश की जमीन पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन शांति को कमजोरी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक स्थिरता चाहता है, लेकिन अपनी रणनीतिक संप्रभुता की कीमत पर नहीं और खतरा होने पर देश अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है. श्री सिंह ने रविवार को यहां एक सम्मेलन में कहा कि भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों के साथ बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती.
उन देशों को एक स्पष्ट संदेश भेजा जाना चाहिए जो आतंकवाद को आधिकारिक नीति के साधन के रूप में उपयोग करते हैं या आतंकवादियों को पनाह देते हैं। उन्होंने कहा कि जब तक पड़ोसी देश की आतंकवाद की नीति जारी रहेगी तब तक भारत को उसके खिलाफ सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार है.
श्री सिंह ने राष्ट्रीय एकता को राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर विभाजन से ऊपर उठकर राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील की. उन्होंने सम्मान, संचार, समृद्धि, सुरक्षा और संस्कृति सहित भारत के दृष्टिकोण के पांच रणनीतिक स्तंभों को 'वसुधेओ कटंबक्कम' और 'सब का साथ, सबका विकास' बताया। उन्होंने कहा कि भारत ग्लोबल साउथ के लिए एक विश्वसनीय भागीदार और 'विशु बंधु' के रूप में उभर रहा है। वैक्सीन मित्र के तहत 100 से अधिक देशों को 30 करोड़ से अधिक कोविड टीके उपलब्ध कराए गए हैं। भारत ने विकासशील देशों को दवाओं, डिजिटल भुगतान, विशेषज्ञता और संसाधनों के माध्यम से भी मदद की है।
रक्षा आत्मनिर्भरता की बात करते हुए उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये हो गया है. अब 2029 तक 50,000 करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट 7.85 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें से पूंजीगत खरीद बजट का लगभग 75 प्रतिशत यानी 1.39 लाख करोड़ रुपये घरेलू उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि युद्ध की बदलती प्रकृति को देखते हुए, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, स्वायत्त प्रणाली, क्वांटम और हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकियों के साथ साइबर, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना युद्ध में क्षमताओं को बढ़ाना होगा। 509 रक्षा उपकरणों और प्रणालियों को स्वदेशीकरण सूची में शामिल किया गया है, जबकि डीपीएसयू की 5,417 वस्तुओं की सूची में से लगभग 3,300 का स्वदेशीकरण पूरा हो चुका है।
रक्षा क्षेत्र में 16,000 से अधिक एमएसएमई, स्टार्ट-अप, विश्वविद्यालय और अनुसंधान संस्थान जुड़े हुए हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा गलियारों में लगभग 70,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। 'सर्जन' के तहत लगभग 33,000 आयातित वस्तुओं की पहचान की गई, जिनमें से लगभग 15,700 का स्वदेशीकरण किया गया है। इस साल मार्च तक, 676 स्टार्टअप और इनोवेटर्स शामिल हो चुके हैं और आईडीएक्स के तहत 551 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। रक्षा मंत्री ने घोषणा की कि डीआरडीओ द्वारा विकसित पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की तकनीक पात्र भारतीय उद्योगों को दी जाएगी ताकि निजी कंपनियां उनका निर्माण कर सकें। उन्होंने कहा कि अनुसंधान एवं विकास में डीआरडीओ और उत्पादन में उद्योग को अधिक भूमिका देकर भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।
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