न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और योग्य लोगों से मिलता है: सीजेआई सूर्य कांत
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पटना, 03 दिसंबर (एबीएन) सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (सीजेआई) सूर्य कांत ने शनिवार को कहा कि न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और सक्षम लोगों से मिलता है और इसी समझ के साथ न्यायिक प्रणाली को एक व्यापक, मजबूत और मानवीय न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में लगातार आगे बढ़ना होगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस आज पटना हाई कोर्ट के परिसर में सात अलग-अलग भवनों और ढांचों के उद्घाटन के बाद जजों, वकीलों और वरिष्ठ अधिकारियों के एक समारोह से संबोधित कर रहे थे। सीजेआई ने कहा कि न्याय मशीनों से नहीं, बल्कि संवेदनशील और सक्षम लोगों से मिलता है और इसी समझ के साथ हमें एक व्यापक, मजबूत और मानवीय न्याय प्रणाली के निर्माण की दिशा में लगातार आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पाटलिपुत्र की धरती अनुशासन, तर्क और प्रशासनिक दृष्टि का प्रतीक रही है। यह वह धरती है जहां से आधुनिक प्रशासन, नैतिकता और सार्वजनिक कल्याण के सिद्धांतों को बढ़ावा मिला है। उन्होंने कहा कि पटना हाई कोर्ट एक संवैधानिक संस्था के रूप में न केवल संविधान के कार्यान्वयन का गवाह रहा है, बल्कि अधिकारों और स्वतंत्रताओं के निरंतर विकास के यात्रा का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। श्री सूर्य कांत ने कहा कि सदियों से जो तत्व हमारे संस्थानों को एक श्रृंखला में पिरोए रखता है, वह संस्थागत क्षमता में निवेश है, चाहे वह भौतिक संसाधन हों, प्रशासनिक ढांचा हो या मानव संसाधन। जब हम क्षमता निर्माण की बात करते हैं, तो इसका सीधा संबंध न्याय तक प्रभावी पहुंच से होता है। इसका उद्देश्य एक ऐसी न्यायिक प्रणाली तैयार करना है जो बढ़ती आबादी, मामलों की संख्या और विवादों की जटिलता जैसी चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना कर सके। उन्होंने कहा कि मजबूत और प्रभावी प्रशासन न्यायिक प्रणाली की रीढ़ की हड्डी होती है। फाइलों की व्यवस्थित देखभाल, रिकॉर्ड का संरक्षण और न्यायिक निर्णयों का प्रभावी प्रबंधन यह सभी कार्य बाहरी तौर पर साधारण लगते हैं, लेकिन इनसे ही न्यायिक प्रदर्शन सुनिश्चित होता है। जब प्रशासन सुचारु रूप से काम करता है, तो जज अपने मूलभूत कर्तव्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और न्याय के चाहने वालों को एक पारदर्शी और विश्वसनीय प्रणाली का अनुभव प्राप्त होता है। सीजेआई ने कहा कि वर्तमान समय में प्रौद्योगिकी, संस्थागत स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गई है। डिजिटल, डेटा आधारित और उपयोगकर्ता-केंद्रित प्रणाली न केवल देरी को कम करती हैं, बल्कि पारदर्शिता में वृद्धि करती हैं और वृद्धों, विकलांग व्यक्तियों और दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए न्याय को अधिक सुलभ बनाती हैं। यही वास्तविक अर्थों में न्याय तक पहुंच है। उन्होंने कहा कि यह भी आवश्यक है कि प्रौद्योगिकी समावेश का साधन बने, न कि बहिष्कार का। इसके लिए गोपनीयता, विश्वास और डिजिटल असमानता के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना होगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि न्यायिक प्रणाली की आत्मा मानव संसाधन हैं। प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और निरंतर सीखने की प्रक्रिया से ही न्यायिक प्रणाली मजबूत होती है। अदालत के परिसर को केवल विवादों के निपटारे के स्थान के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा, संवाद और सहयोग के केंद्र के रूप में भी होना चाहिए। साथ ही यह स्वीकार करना होगा कि न्यायिक प्रणाली से जुड़े सभी व्यक्तियों का शारीरिक और मानसिक कल्याण भी न्याय का एक आवश्यक हिस्सा है। श्री सूर्य कांत ने इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि चंपारण से प्राप्त सबक हमें एक मजबूत याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि इतिहास हमें सिखाता है कि हमें सबसे ऊंचा नहीं, बल्कि सही आवाज सुननी चाहिए। उन्होंने कहा कि संस्थानों को उन लोगों से लगातार जुड़े रहना चाहिए जिनकी वे सेवा करते हैं। यह उम्मीद की जाती है कि न्यायालय संविधान निर्माताओं की बुद्धिमत्ता से मार्गदर्शन प्राप्त करते रहेंगे और अपने प्रत्येक निर्णय में गहरे सार्वजनिक कर्तव्य की भावना का प्रदर्शन करेंगे। सीजेआई ने आज पटना हाई कोर्ट के परिसर में एडीआर भवन, ऑडिटोरियम, आईटी भवन, प्रशासनिक ब्लॉक, मल्टी लेवल कार पार्किंग, अस्पताल, आवासीय परिसर और एडवोकेट जनरल कार्यालय का उद्घाटन किया, जबकि गया में जजों के लिए निर्मित गेस्ट हाउस का ई-उद्घाटन भी किया। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के जज एहसान उद्दीन अमानुल्लाह, जज राजेश बंदल, पटना हाई कोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस सुधीर सिंह सहित पटना हाई कोर्ट के अन्य जज मौजूद थे। इस कार्यक्रम से ओडिशा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संगम साहू वर्चुअल माध्यम से जुड़े। समारोह में बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और बिहार सरकार के एडवोकेट जनरल पीके श