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दूसरी राज्यों से पलायन करने वाले मजदूरों को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है : जस्टिस राम सुब्रमण्यन
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दूसरी राज्यों से पलायन करने वाले मजदूरों को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है : जस्टिस राम सुब्रमण्यन

Awaz E Bihar•13 मई 2026 को 05:47 pm बजे•18 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यम ने कहा है कि अन्य राज्यों से प्रवास करने वाले या प्रवासी मजदूरों को अधिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है क्योंकि उनमें से अधिकांश का संबंध असंगठित क्षेत्र से है। न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यम ने बुधवार को 'प्रवासी मजदूरों के अधिकारों का संरक्षण: सरकार और निजी क्षेत्र की संयुक्त जिम्मेदारी' विषय पर अपने कोर ग्रुप की बैठक में कहा कि प्रवासी मजदूर असंगठित क्षेत्र से जुड़े होने के कारण सबसे अधिक चुनौतियों का सामना करते हैं। भाषा की बाधाएं, लगातार स्थान परिवर्तन और स्थायी आवास की कमी उन्हें अपने अधिकारों का संरक्षण करने से रोकती है। उन्होंने कहा कि भारत में मजदूरों के संरक्षण के लिए मजबूत कानून मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अंतर-राज्य समन्वय, पोर्टेबल सोशल सुरक्षा और श्रम कानूनों के सख्त पालन जैसे सिस्टम से संबंधित सुधारों की आवश्यकता है। उन्होंने निर्माण, होटल, व्यापार और घरेलू कार्यों में लगे प्रवासी मजदूरों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। एनएचआरसी के सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ) बिदित रंजन सारंगी ने कहा कि प्रवासी मजदूरों को न तो उचित सम्मान मिलता है और न ही समय पर मजदूरी। उन्होंने कहा कि मजदूरी का समय पर भुगतान न होना उनके घर छोड़कर काम करने के उद्देश्य को ही विफल कर देता है। उन्होंने मजदूरों के लिए उचित वेतन, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं और बच्चों की शिक्षा को सुनिश्चित करने पर जोर दिया। एनएचआरसी के महासचिव भरत लाल ने कहा कि दुनिया भर में प्रवासी मजदूर अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं और भारत की लगभग 28.9 प्रतिशत आबादी प्रवासी मजदूरों पर आधारित है। उन्होंने कोविड-19 के दौरान प्रवासी मजदूरों को सामना करने वाली कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए कहा कि कई आउटसोर्स मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिलती है। उन्होंने 'वन नेशन वन राशन कार्ड' योजना की प्रशंसा करते हुए कहा कि कानून और इसके क्रियान्वयन के बीच की खाई को भरना आवश्यक है। बैठक में विभिन्न मंत्रालयों, उद्योग संगठनों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और विशेषज्ञों ने प्रवासी मजदूरों के कल्याण के लिए कई सुझाव दिए। इनमें राष्ट्रीय प्रवासी मजदूर डैशबोर्ड बनाना, ई-श्रम पोर्टल को अन्य सरकारी डेटाबेस से जोड़ना, मजदूरों के लिए बहुभाषी शिकायत निवारण प्रणाली विकसित करना, समयबद्ध शिकायत समाधान प्रणाली लागू करना और 'लिविंग वेज' की अवधारणा को बढ़ावा देना शामिल है।
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