६.५८ लाख करोड़ रुपये के माध्यम से १७० राष्ट्रीय परियोजनाओं पर काम तेजी से जारी : स्मृति चौधरी
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पटना (एबीएन) उपमुख्यमंत्री सुमित कुमार सिंह चौधरी ने कहा कि बिहार में 6.58 लाख करोड़ रुपये के निवेश से 170 राष्ट्रीय परियोजनाएं पूरी की जा रही हैं। यही कारण है कि बिहार तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से परिणाम दे रही हैं। कांग्रेस के शासनकाल में योजनाओं का केवल घोषणा किया जाता था, लेकिन उनको प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। इसके विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में, योजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है और प्रगति की सख्त निगरानी की जा रही है, जो प्रगति को दर्शाती है और विकास को तेज करती है।
उपमुख्यमंत्री सुमित कुमार सिंह चौधरी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठक के माध्यम से 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की समीक्षा की और उन्हें उनकी प्रगति को तेज करने का निर्देश दिया। इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं बिहार में भी तेजी से आकार ले रही हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार में वर्तमान में कुल 170 राष्ट्रीय बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं चल रही हैं, जिनमें 6.58 लाख करोड़ रुपये का निवेश है। इनमें से 1.28 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 60 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी हैं और जनता के लिए समर्पित की गई हैं, जबकि 110 परियोजनाएं, जिनकी कुल लागत 5.30 लाख करोड़ है, विभिन्न चरणों में निर्माणाधीन हैं।
सड़कों और राजमार्गों का क्षेत्र परियोजनाओं की संख्या के मामले में सबसे बड़ा है, जो 72 परियोजनाओं पर आधारित है। रेलवे के क्षेत्र में 38 परियोजनाएं चल रही हैं, जिससे बिहार का राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से संपर्क और मजबूत हो रहा है। बिजली, तेल और गैस, दूरसंचार, शहरी बुनियादी ढांचे और जलमार्गों के क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री की प्रगति योजना के तहत बिहार में 41 बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की जा रही है। इन परियोजनाओं में 2.13 लाख करोड़ रुपये का कुल निवेश शामिल है। इनमें से 12 परियोजनाएं, जिनकी लागत 51,833 करोड़ रुपये है, पूरी हो चुकी हैं, जबकि शेष 29 परियोजनाएं, जिनकी लागत 1.62 लाख करोड़ रुपये है, तेजी से आगे बढ़ रही हैं।
प्रगति प्रणाली ने रेलवे, सड़क, बिजली और शहरी परियोजनाओं से संबंधित लंबित मुद्दों का समाधान किया है, और केंद्र और बिहार सरकारों के बीच बेहतर तालमेल को बढ़ावा दिया है। परियोजना से संबंधित कुल 266 मुद्दों की पहचान की गई थी, जिनमें से 255 का समाधान किया जा चुका है। इससे बिहार को लगभग 96 प्रतिशत का समाधान दर मिलता है।
प्रगति परियोजनाओं से संबंधित 156 मुद्दों में से, 149 का समाधान हो चुका है, और वर्तमान में केवल 11 लंबित हैं, जिन पर सक्रिय रूप से काम किया जा रहा है। सबसे अधिक मुद्दे भूमि अधिग्रहण से संबंधित थे, जिनकी संख्या 167 थी। इसके अलावा, वन और पर्यावरण मंजूरी से संबंधित 32 और मार्ग के अधिकार/उपयोग के अधिकार से संबंधित 23 मुद्दों की पहचान की गई।
उन्होंने कहा कि कानून और व्यवस्था, बिजली, पानी, ईंधन और निर्माण से संबंधित अधिकांश मुद्दे हल हो चुके हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से संबंधित सभी 124 मुद्दों का 100 प्रतिशत समाधान किया जा चुका है। सड़कों, पुलों और रेलवे की कई बड़ी परियोजनाएं 99 से 100 प्रतिशत तक पहुंच चुकी हैं।
पूर्वी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, रेल-कम-सड़क पुलों और बिजली परियोजनाओं को बिहार की बड़ी उपलब्धियों के रूप में बताते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ये परियोजनाएं राज्य में रोजगार पैदा करने और आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान कर रही हैं। बिहार अब केवल परियोजना की मंजूरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से क्रियान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने वाला राज्य बन गया है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार भूमि की उपलब्धता, कानून और व्यवस्था और परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक सहयोग प्रदान कर रही है। शेष चुनौतियों का समय पर समाधान करने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर निरंतर निगरानी की जा रही है।
कुल मिलाकर, बिहार अब पूर्वी भारत में कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचे के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहा है।