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अमेरिकी सेना आबनाए हुर्मुज के निकट आए तो वापस नहीं जा पाएगी
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अमेरिकी सेना आबनाए हुर्मुज के निकट आए तो वापस नहीं जा पाएगी

Awaz E Bihar•4 मई 2026 को 03:44 pm बजे•5 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

तेहरान/वाशिंगटन, 4 अप्रैल (एजेंसी)। ईरान ने सोमवार को अमेरिका को चेतावनी दी कि वह होरमुज़ जलडमरूमध्य से दूर रहे। ईरान का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के जवाब में आया है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका उन जहाजों को मुक्त कराने में मदद करेगा जो ईरान और अमेरिका-इज़राइल युद्ध के कारण खाड़ी में फंसे हुए हैं। ट्रंप के अनुसार ये जहाज लगभग दो महीने से फंसे हुए हैं और चालक दल के पास भोजन और अन्य सामग्री की कमी हो गई है। ट्रंप ने इस कदम को "प्रोजेक्ट फ्रीडम" नाम दिया है। ट्रंप ने रविवार को "ट्रुथ सोशल" पर कहा, "हमने उन देशों से कहा है कि हम उनके जहाजों को उन सीमित जलमार्गों से सुरक्षित तरीके से निकालने में मदद करेंगे।"

ईरान की सशस्त्र सेना की संयुक्त कमान के प्रमुख अली अब्दुल्लाही ने इसका कड़ा जवाब दिया। उन्होंने अमेरिकी सेना को चेतावनी दी कि वह होरमुज़ जलडमरूमध्य से दूर रहे। यदि अमेरिकी सेना होरमुज़ के पास आई या प्रवेश किया तो उस पर हमला किया जाएगा। उन्होंने व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को निर्देश दिया कि वे ईरानी सेना के साथ संपर्क के बिना किसी भी प्रकार की गतिविधि न करें। अब्दुल्लाही ने कहा कि होरमुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा ईरान के हाथ में है और जहाजों के सुरक्षित मार्ग की सुरक्षा ईरान की सशस्त्र सेना करेगी।

अल जज़ीरा, सीबीएस, सीएनएन और एक्सियोस की रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने घोषणा की है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर 15,000 सैन्य कर्मियों, 100 से अधिक जमीनी और समुद्री विमानों, युद्धपोतों और ड्रोन के साथ इस मिशन में मदद करेगा। सेंटकॉम के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा, "इस रक्षा मिशन के लिए हमारा समर्थन क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि हम समुद्री नाकाबंदी को भी बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं।"

इस बीच ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार वाशिंगटन ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान के 14 सूत्रीय प्रस्ताव का जवाब भेजा है, जिसकी तेहरान समीक्षा कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई के हवाले से कहा गया, "हमारे पास अमेरिका के साथ परमाणु कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं हुई है।" इससे पहले ट्रंप तेहरान के इस प्रस्ताव को अस्वीकार्य कर चुके हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि "प्रोजेक्ट फ्रीडम" के तहत अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत होरमुज़ से गुजरने वाले जहाजों को सीधे एस्कॉर्ट नहीं करेंगे, बल्कि फंसे हुए जहाजों को मार्ग दिखाएंगे, जबकि ईरानी हमलों को रोकने के लिए अमेरिकी युद्धपोत पास में मौजूद रहेंगे।

इस बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि अमेरिका ने एक ईरानी कंटेनर जहाज पर मौजूद 22 चालक दल के सदस्यों को पाकिस्तान स्थानांतरित कर दिया है, जहां उन्हें ईरानी अधिकारियों के हवाले किया जाएगा। मंत्रालय ने इस कदम को विश्वास बढ़ाने की कोशिश बताया है। आगे कहा गया कि आवश्यक मरम्मत के बाद ईरानी जहाज को भी पाकिस्तान के समुद्री सीमा क्षेत्र में वापस लाया जाएगा, ताकि उसे उसके मूल मालिकों को सौंपा जा सके। इस जहाज को पिछले महीने ओमान की खाड़ी में एक हमले के दौरान कब्जे में लिया गया था, जिसे तेहरान ने अमेरिकी समुद्री डाकूपन करार दिया था।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी कार्रवाइयों से स्थिति और अधिक जटिल हो जाएगी और खाड़ी में जहाजों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। उनका कहना है कि वे होरमुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं और सभी व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को ईरानी सेना के साथ समन्वय के बिना किसी भी प्रकार की गतिविधि से बचना चाहिए।

ईरानी संसद (पार्लियामेंट) की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी ने चेतावनी दी है कि इस समुद्री प्रणाली में अमेरिकी हस्तक्षेप को युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने कहा कि यह होरमुज़ जलडमरूमध्य डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से नहीं चलाया जाएगा।

दूसरी ओर ब्रिटिश समुद्री व्यापारिक संचालन ने बताया है कि क्षेत्र में जारी सैन्य अभियानों के कारण होरमुज़ जलडमरूमध्य में सुरक्षा खतरों का स्तर अभी भी चिंताजनक है। जहाज मालिकों को सलाह दी गई है कि वे ओमानी अधिकारियों के साथ संपर्क में रहें और ओमानी क्षेत्रीय जल से गुजरने पर विचार करें, जहां अमेरिका ने एक बेहतर सुरक्षा क्षेत्र स्थापित किया है।

यह स्पष्ट है कि डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि सोमवार से अमेरिका होरमुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की निगरानी करेगा, क्योंकि दुनिया भर क
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