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आईएसआरबी रिपोर्ट: साइबर अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन शोषण की स्थिति चिंताजनक, कुल अपराधों में कमी
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आईएसआरबी रिपोर्ट: साइबर अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन शोषण की स्थिति चिंताजनक, कुल अपराधों में कमी

Awaz E Bihar•8 मई 2026 को 05:10 pm बजे•86 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 'भारत में अपराध 2024' और 'दुर्घटनात्मक मौतें और आत्महत्या 2024' (एडीएसआई 2024) की विस्तृत रिपोर्ट जारी कर दी है।
वर्ष 2024 के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट देश की कानून व्यवस्था की स्थिति का एक मिलाजुला चित्र प्रस्तुत करती है। जहां एक ओर महिलाओं, दलितों (एससी) और आदिवासियों (एसटी) के खिलाफ अपराधों में कमी देखी गई है, वहीं साइबर अपराध और बच्चों के खिलाफ यौन शोषण के बढ़ते आंकड़ों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, देश में कुल अपराधों में 6 प्रतिशत की कमी आई है। वर्ष 2023 में जहां 62.41 लाख मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर 58.86 लाख रह गई है। प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध की दर भी 448.3 से घटकर 418.9 हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'भारतीय नवीन संहिता (बीएनएस) जैसे नए कानूनों के लागू होने के बाद 'हत्या के मामलों के वर्गीकरण में परिवर्तन के कारण इन मामलों में 30 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराध हैं। पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, बच्चों के खिलाफ अपराधों में 5.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और 2024 में कुल 1,87,702 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 69,191 मामले केवल पॉक्सो अधिनियम के थे, जो कि कुल अपराधों का 37 प्रतिशत है। इसके साथ ही लापता बच्चों की संख्या में भी वृद्धि हुई है।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 1.5 प्रतिशत की मामूली कमी आई है (कुल 4.41 लाख मामले), लेकिन पति या रिश्तेदारों द्वारा 'उत्पीड़न और हिंसा के मामले अभी भी इस सूची में सबसे ऊपर हैं। छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गोवा और चंडीगढ़ में 'बलात्कार की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक पाई गई है।
आत्महत्या के आंकड़े (एडीएसआई) सामाजिक स्थिति पर गहरे प्रश्न उठाते हैं। वर्ष 2024 में कुल 1,70,746 लोगों ने अपनी जीवन का अंत किया। इसका सबसे अधिक प्रभाव दैनिक मजदूरों, किसानों, बेरोजगार युवाओं और घरेलू महिलाओं पर देखा गया है। शहरों में दिल्ली आत्महत्या के मामलों में शीर्ष पर है, जिसके बाद बेंगलुरु का स्थान आता है। इसके अलावा, नशीली दवाओं के सेवन से होने वाली मौतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे तमिलनाडु और पंजाब सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं।
डिजिटल इंडिया के युग में साइबर अपराध सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है, जिसमें 17 से 18 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है। साइबर अपराध के मामले 86,420 से बढ़कर 1,01,928 तक पहुंच गए हैं, जिनमें से 72.6 प्रतिशत ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित हैं। राज्यों में तेलंगाना (27,230 मामले) साइबर अपराध का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है।
सामाजिक सुरक्षा के संदर्भ में एक सकारात्मक संकेत यह है कि दलितों (एससी) के खिलाफ अपराधों में 3.6 प्रतिशत और आदिवासियों (एसटी) के खिलाफ अपराधों में 23 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी आई है। हत्या के मामलों में भी 2.4 प्रतिशत की मामूली कमी देखी गई है।
इन आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि देश का भविष्य अर्थात बच्चे कितने असुरक्षित हैं। आने वाले वर्षों में सरकार और प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और बच्चों के खिलाफ उनके अपने ही माहौल में होने वाले शोषण को रोकना होगा।
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