अनंत सिंह और नीलम देवी की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश
Awaz E Bihar
••0 व्यूज़•5 मिनट पढ़ें
पटना, 24 अक्टूबर (एबीएन) जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोलने और जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार करने के मामले में कड़ा कदम उठाते हुए मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह और पूर्व विधायक नीलम देवी को 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। पार्टी ने अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए भी बिहार विधानसभा के अध्यक्ष से संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा की ओर से जारी आधिकारिक आदेश में दोनों नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने और संगठन के निर्देशों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। आदेश में अनंत सिंह पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और विधान परिषद चुनाव में जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ काम करते हुए दूसरी पार्टी के उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार करने का आरोप भी लगाया गया है। अनंत सिंह और जेडीयू के विधान परिषद उम्मीदवार नीरज कुमार के बीच विवाद की जड़ पुरानी राजनीतिक रंजिश बताई जाती है। मिस्टर सिंह का आरोप है कि मोकामा विधानसभा चुनाव के दौरान, जब वह जेडीयू में थे और नीतीश कुमार की सरकार का समर्थन कर रहे थे, तब नीरज कुमार ने उनके खिलाफ चुनाव प्रचार किया था। अनंत सिंह ने इस मामले में पार्टी नेतृत्व से शिकायत करने की बात भी कही थी। उनका कहना था कि उस समय नीरज कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जेडीयू ने अपने विधान परिषद सदस्य और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार को फिर से उम्मीदवार बनाया। दूसरी ओर जन सुराज पार्टी ने डॉक्टर अनुज सिंह को मैदान में उतारा। नीरज कुमार से नाराज अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार का समर्थन करने के बजाय जन सुराज के उम्मीदवार के समर्थन में चुनाव प्रचार करने का फैसला किया। 1 अक्टूबर को अनंत सिंह जन सुराज के उम्मीदवार डॉक्टर अनुज सिंह के नामांकन पत्र दाखिल करने के मौके पर उनके समर्थन में पहुंचे और उनके पक्ष में चुनाव प्रचार करने का ऐलान किया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न इलाकों में जनसंपर्क अभियान चलाया और रोड शो किए। मिस्टर सिंह ने चुनाव प्रचार के दौरान जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार पर तीखे हमले किए और मतदाताओं से उन्हें हराने की अपील की। इससे पार्टी के भीतर विवाद और गहरा गया। अनंत सिंह का रुख सिर्फ नीरज कुमार का समर्थन न करने तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने खुलकर उनके खिलाफ चुनाव प्रचार किया और जन सुराज के उम्मीदवार को कामयाब बनाने की अपील की। जेडीयू नेतृत्व ने इसे व्यक्तिगत नाराजगी से आगे बढ़कर पार्टी अनुशासनहीनता और आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ गतिविधि का मामला करार दिया। दोनों नेताओं के बीच विवाद बढ़ने के बाद जेडीयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने अनंत सिंह को मनाने की कोशिश की। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बातचीत के बाद ललन सिंह ने अनंत सिंह से संपर्क किया और उन्हें पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी और चुनाव प्रचार से दूर रहने के लिए समझाया। 5 अक्टूबर को ललन सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उनकी अनंत सिंह से बात हो गई है और वह जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ बयान नहीं देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि अनंत सिंह जेडीयू में थे, हैं और रहेंगे। हालांकि, इस बातचीत के बावजूद अनंत सिंह ने नीरज कुमार के पक्ष में चुनाव प्रचार करने से इनकार कर दिया। बाद के दिनों में अनंत सिंह ने जन सुराज के उम्मीदवार के समर्थन में दोबारा चुनाव प्रचार किया। इससे साफ हो गया कि ललन सिंह की मध्यस्थता के बावजूद दोनों नेताओं के बीच विवाद सुलझ नहीं सका। इसके बाद वोटिंग के दिन, 23 अक्टूबर को, ललन सिंह के बारे में अनंत सिंह की एक और टिप्पणी चर्चा का विषय रही। मीडिया की खबरों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि बिहार में 100 ललन सिंह हैं, मैं नहीं जानता। इस टिप्पणी को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके बढ़ते टकराव के रूप में देखा गया। इस पूरे मामले में नीरज कुमार और अनंत सिंह के बीच पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ खुलकर चुनाव प्रचार करना और पार्टी नेतृत्व की समझाने की कोशिश के बावजूद अपना रुख न बदलना, पार्टी से निकाले जाने की कार्रवाई की मुख्य वजहें बनीं। जेडीयू ने अनंत सिंह की प्राथमिक सदस्यता खत्म करने के साथ बिहार विधानसभा के अध्यक्ष से उनकी विधानसभा सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की है। पार्टी ने इसके लिए संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला दिया है। हालांकि, विधानसभा सदस्यता के बारे में आखिरी फैसला संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत विधानसभा के अध्यक्ष को करना होगा। पार्टी से निकालना और विधानसभा की सदस्यता खत्म होना दो अलग-अलग कार्रवाइयां हैं। अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी को भी पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप में 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया गया है। पार्टी के आदेश के मुताबिक, उनकी प्राथमिक सदस्यता भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।