भाजपा और आरएसएस आज भी दलितों को समानता का अधिकार नहीं देना चाहते: खरगे
Awaz E Bihar
••2 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर दलितों के साथ भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए रविवार को कहा कि आजादी के 8 दशकों बाद भी देश में जातिगत भेदभाव बरकरार है और जब तक देश की बड़ी आबादी को समानता और अपनेपन का अधिकार नहीं मिलेगा, तब तक राष्ट्रीय एकता का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता। पटना के बापू सभागार में बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए श्री खरगे ने कहा कि भाजपा और आरएसएस छूआछूत के समर्थक हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दलितों की स्थिति में सुधार नहीं चाहते। उन्होंने अपनी हल्द्वानी यात्रा का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि 8 अगस्त 2026 को वहां रामलीला मैदान में उनकी जनसभा के बाद भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों ने उस मंच का हवन करके शुद्धिकरण किया था, जहां उनका कार्यक्रम आयोजित हुआ था। उन्होंने कहा कि इस मामले में संसद में भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने दुख व्यक्त किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी गई। श्री खरगे ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री संविधान के बारे में बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन जातिवादी सोच रखने वालों को संरक्षण प्रदान करते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि श्रीकृष्ण सिंह आधुनिक बिहार में लोकतंत्र की नींव मजबूत करने वाले नेताओं में शामिल थे। उन्होंने जमींदारी का उन्मूलन कराके और कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने का प्रयास करके सामाजिक न्याय का एक नया अध्याय शुरू किया। कृषि, उद्योग, शिक्षा, सिंचाई और संस्थानों के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने कहा कि 1937 में श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में बिहार में कांग्रेस की पहली सरकार बनी थी और 1946 में दूसरी सरकार स्थापित हुई। उस समय अंग्रेजों का शासन था और मुख्यमंत्री को प्रीमियर कहा जाता था। संविधान के तहत 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव के बाद से 31 जनवरी 1961 तक श्री बाबू बिहार के मुख्यमंत्री रहे। श्री खरगे ने कहा कि श्री बाबू के शासनकाल में जमींदारी के उन्मूलन, भूमि सुधार से संबंधित कानून लागू किए गए। बरौनी तेल रिफाइनरी, खाद के कारखाने, थर्मल पावर प्लांट और सिंदरी खाद कारखाने जैसे औद्योगिक प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिला। पहला रेल एवं सड़क राजेंद्र पुल भी उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल था। उनके शासनकाल की कई योजनाएं आज झारखंड में भी मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि उस दौर में बिहार की गिनती देश के बेहतर शासन वाले राज्यों में होती थी और कई विदेशी अर्थशास्त्रियों ने भी इसकी सराहना की थी। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि श्री बाबू ने अपनी ही जाति के प्रभावशाली जमींदारों के विरोध के बावजूद जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार के उपाय किए। उन्होंने बिहार में औद्योगिक विकास को गति दी, शैक्षणिक संस्थान स्थापित किए और सिंचाई की सुविधाओं की नींव रखी। श्री बाबू ने सांप्रदायिकता का विरोध करते हुए स्पष्ट किया था कि चाहे वह हिंदुओं की तरफ से हो या मुसलमानों की तरफ से, दोनों ही बिहार के विकास के लिए खतरनाक हैं। श्री खरगे ने श्री बाबू के सांप्रदायिकता विरोधी रुख का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी के बाद देश को अनाज की कमी सहित कई गंभीर चुनौतियों का सामना था। उस समय भी आरएसएस और अन्य सांप्रदायिक ताकतें दंगे भड़काने में लगी हुई थीं, लेकिन श्री बाबू ने मजबूती से उनका मुकाबला किया। उन्होंने 1950 में कहा था कि बिहार में हाल के वर्षों के दौरान असाधारण सांप्रदायिक शांति रही है और फासीवाद जैसी सोच रखने वाली कट्टरपंथी सांप्रदायिकता सामने आई थी। हिंदुओं या मुसलमानों, किसी भी पक्ष की सांप्रदायिकता ने जब धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र और मानवीय गरिमा के सिद्धांतों को चुनौती दी, तो उसे सख्ती से रोका गया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि श्री बाबू ने जाति के आधार पर भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाया और देवघर के प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम मंदिर में दलितों और वंचित वर्गों के लोगों के प्रवेश पर लगे प्रतिबंध को खत्म कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1953 में कड़े विरोध के बावजूद वे सैकड़ों लोगों के साथ मंदिर पहुंचे और दलितों को प्रवेश दिलाया। श्री खरगे ने कहा कि आज भी भाजपा और आरएसएस में जाति के आधार पर भेदभाव और संविधान विरोधी सोच रखने वाले लोग मौजूद हैं। उन्होंने बिहार के लोगों और जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे छुआछूत की सोच को जड़ से खत्म करने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि इस सामाजिक बीमारी के खात्मे के बाद ही देश में शांति और विकास का रास्ता साफ होगा। छुआछूत हिंदू समाज की एकता में भी एक बड़ी रुकावट है और इसी वजह से कई लोग धर्म परिवर्तन करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस लोगों को डराता है, लेकिन छुआछूत खत्म करने के लिए गंभीर प्रयास नहीं करता।