बिहार में सक्रिय जमीन माफियाओं का मार्च तक होगा हिसाब: विजय कुमार सिन्हा
Awaz E Bihar••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
उपमुख्यमंत्री और शहरी विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने रविवार को कहा कि राज्य में सक्रिय जमीन माफियाओं का मार्च तक हिसाब कर दिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने यहां "स्टेकहोल्डर्स परामर्श शहरी योजना योजना" विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में कहा कि बिहार के शहरी विकास के रास्ते में जमीन माफिया एक नई और गंभीर चुनौती के रूप में सामने आई है। उन्होंने कहा कि राजस्व और भूमि सुधार मंत्री के रूप में उन्हें इस समस्या को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि राज्य में सबसे अधिक विवाद जमीन से संबंधित हैं, जहां एक-एक इंच जमीन के लिए लोग अपने ही भाई का खून बहाने के लिए तैयार हो जाते हैं। इस स्थिति पर काबू पाने के लिए सभी हलकों में सर्कल गार्ड की तैनाती की गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य भर में सक्रिय जमीन माफियाओं का आगामी मार्च तक हिसाब कर दिया जाएगा।
श्री सिन्हा ने बताया कि विभाग ने इस समस्या से निपटने के लिए आयुक्त स्तर पर भूमि सुधार और जनकल्याण संवाद के माध्यम से कार्रवाई की शुरुआत की है। इस समय विभाग की पहली प्राथमिकता जमीन की पैमाइश कराकर रिकॉर्ड की शुद्धता और परिमार्जन को सही करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस अभियान में रुकावट डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में इस समय तीन तरह के माफिया सक्रिय हैं - पहला जमीन माफिया, दूसरा रेत माफिया और तीसरा शराब माफिया। रेत माफियाओं पर काबू पा लिया गया है और अब जमीन माफियाओं की बारी है, जिसका मार्च तक इलाज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी कर रहे हैं।
श्री सिन्हा ने कहा कि लोग रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में शहरों का रुख करते हैं। आज देश की लगभग 36 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्रों में रहती है, जबकि बिहार में यह दर महज 16.6 प्रतिशत है, जो चिंता का विषय है। नई सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में राज्य में 11 नए टाउनशिप तैयार करने का फैसला किया है, जिनमें नौ मंडल मुख्यालयों के अलावा सोनपुर और सीतामढ़ी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बिहार को पूर्वी भारत के टेक हब के रूप में विकसित किया जाएगा और इसके लिए डिफेंस कॉरिडोर के साथ सेमीकंडक्टर यूनिट्स स्थापित की जाएंगी।
श्री सिन्हा ने कहा कि बिहार में शहरीकरण की गति तेज की जा रही है। पहले लोग हत्या और लूट से बचने के लिए शहरों की ओर जाते थे, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा काफी हद तक विकसित हो गया है। लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था की समस्याओं के कारण पलायन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि शहर तभी समृद्ध हो सकते हैं जब गांव भी विकसित हों। इसी उद्देश्य से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं को और बेहतर बनाया जा रहा है।
कार्यशाला में शहरी विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार ने तेजी से विकास किया है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में विकास की गति अभी भी संतोषजनक नहीं है। उन्होंने बिहार टाउन प्लानिंग पॉलिसी 2025 पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिल्डिंग बायलॉज को सरल बनाने के लिए उनमें बदलाव किया जाएगा। अब बायलॉज का उल्लंघन करने पर जेल की सजा के बजाय आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया जा रहा है।
इस अवसर पर पटना की मेयर सीता साहू, प्रधान सचिव विनय कुमार, सचिव संदीप कुमार पाडकलक्टी, पटना के डिवीजनल कमिश्नर अनिमेष पराशर सहित विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।