इरशाद अली आज़ाद पर जायदाद को छोटे टुकड़ों में बांटने का गंभीर आरोप
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पटना : (एबीएन) शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अरशद अली आजाद के कार्यकाल में हुए अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है, साथ ही उनकी संपत्ति की जांच ईडी से कराने की मांग की गई है। आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्फ सुरक्षा परिषद और राष्ट्रीय मोमिन सम्मेलन द्वारा यह मांगें की गई हैं।
पिछले दिनों वक्फ सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अली इमाम भारती ने शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अरशद अली आजाद पर अमीरी बेगम वक्फ एस्टेट नंबर 27 पर मस्जिद तोड़कर मॉल बनाने का आरोप लगाया था। आज अली इमाम भारती और राष्ट्रीय मोमिन सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हमायूं अन्सारी ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वर्तमान शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष अरशद अली आजाद पर बहुत गंभीर आरोप हैं।
उन्होंने कई दस्तावेज प्रस्तुत करते हुए कहा कि अरशद अली आजाद के कार्यकाल में नौधाल कब्रिस्तान की वक्फ जमीन को अवैध रूप से लीज पर दे दिया गया। स्थानीय लोगों के कड़े विरोध और अदालत की अनुमति लेकर इस मामले में ख्वाजा किला थाने में एफआईआर नंबर 420/18 गंभीर मामला दर्ज किया गया। साथ ही वक्फ एस्टेट नंबर 94 और 95 शेखपुरा बीबी ज़ैतुन्निसा बेगम और अमुन्निसा बेगम की लगभग 600 से 650 एकड़ जमीन अरशद अली आजाद के कार्यकाल में अवैध तरीके से वहां एक मुतवल्ली तनवीर को नियुक्त किया गया।
तनवीर के माध्यम से अरवल के निवासी अशोक कुमार सिंह को पूरी 600 एकड़ जमीन लीज पर दे दी गई। इसमें गंभीर आरोप यह है कि लीज समझौते में यह अधिकार दिया गया कि अशोक कुमार सिंह वक्फ की जमीन को अपने नाम से म्यूटेशन करा सकते हैं। ऐसा आरोप आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन लोगों ने लगाया है। इन लोगों ने कहा कि यह वक्फ अधिनियम का खुला उल्लंघन है। वक्फ किसी की निजी संपत्ति नहीं होती है।
लीज और म्यूटेशन से जुड़े दस्तावेज इन लोगों ने प्रस्तुत किए हैं। साथ ही आज फिर वक्फ नंबर 27 अमीरी बेगम जिस पर मस्जिद को तोड़कर मॉल बना दिया गया है, उसका भी उल्लेख किया। यहां मल्टी कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया गया है। दूसरा वक्फ एस्टेट नंबर 19 मीर नासिर अली सदर गली पटना सिटी यहां एक मस्जिद थी। मस्जिद के पूरे हिस्से को नष्ट कर दो मंजिला इमारत खड़ी कर दी गई है। मस्जिद के नाम पर केवल 10 फीट की एक जगह छोड़ी गई है।
वक्फ एस्टेट नंबर 28 अमीरी बेगम टकिया टोली गुरुद्वारा हॉस्पिटल यहां मस्जिद और इमामबाड़ा दोनों मौजूद थे। इमामबाड़े के ऊपर अपार्टमेंट का निर्माण करा दिया गया है। इन सभी आरोपों को लगाते हुए इन लोगों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मांग की है कि अरशद अली आजाद के पूरे कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उन्हें तत्काल चेयरमैन के पद से हटाया जाए।
जब तक जांच पूरी नहीं हो और उनके और उनके परिवार की संपत्ति की जांच ईडी से कराई जाए। इन लोगों ने मांग की है कि सभी अवैध लीज, म्यूटेशन और निर्मित इमारतों को रद्द किया जाए और आरोपों के सही पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री से इन लोगों ने मांग की है कि ऐसे व्यक्ति को चेयरमैन बना दिया गया जिस पर कई गंभीर आरोप हैं।
अली इमाम भारती द्वारा दी गई एक याचिका पर गृह विभाग के अपर सचिव संजीव कुमार ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव को पत्र लिखा है कि इसकी जांच की जाए। इन लोगों ने कहा है कि अगर सरकार इस पर कार्रवाई नहीं करती है तो आगे यह लड़ाई जारी रखेंगे और इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।
हमायूं अन्सारी ने कहा कि मुख्यमंत्री को चाहिए कि कड़ी से कड़ी तत्काल कार्रवाई करे, नहीं तो वक्फ सुरक्षा परिषद और राष्ट्रीय मोमिन सम्मेलन कानूनी तरीके से आंदोलन तेज करेगा, जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी। राष्ट्रीय मोमिन सम्मेलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जनाब हमायूं अन्सारी ने भी चेयरमैन की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि गंभीर अपराधों में शामिल व्यक्ति को वक्फ बोर्ड के उच्च पद पर नियुक्त करना अत्यधिक चिंताजनक है।
उन्होंने मुख्यमंत्री बिहार जनाब नीतीश कुमार से तत्काल नोटिस लेने और कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील की। वक्फ सुरक्षा परिषद के महासचिव राजू वारिशी ने आरोप लगाया कि वर्ष 2015 से 2020 के दौरान शेखपुरा में स्थित बीबी फैजुन्निसा बेगम और अमुन्निसा बेगम वक्फ एस्टेट नंबर 94 और 95 की लगभग 600 एकड़ जमीन को अवैध तरीके से लीज पर दिया गया।
उनके अनुसार 23 नवंबर 2018 को पटना सिटी के निवासी तनवीर को मुतवल्ली नियुक्त किया गया और 27 नवंबर 2018 को उसी मुतवल्ली के माध्यम से अरवल के निवासी अशोक कुमार को 600 एकड़ जमीन 30 वर्षों के लिए केवल 100 रुपये प्रति एकड़ वार्षिक किराए पर लीज दे दी गई। लीज समझौते में जमीन को निजी नाम पर म्यूटेशन की अनुमति भी दी गई थी।