बैंकों की स्थिति खराब से खराबतर, 'बैंकर कमीशन बनाने' की मांग
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पटना:(एबीएन) अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार (अल-हिंद), पटना ने बिहार राज्य में बुनकरों की दिन-ब-दिन बिगड़ती आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए बिहार सरकार को एक मांग पत्र भेजा है। पत्र में बुनकर समुदाय की वर्तमान दुर्दशा की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया गया है। अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार के जिम्मेदारों ने पत्र में कहा है कि इस समय राज्य के बुनकर अत्यधिक गरीबी की जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण बड़ी संख्या में बुनकर अपने पारंपरिक व्यवसाय को छोड़कर मजदूरी करने के लिए मजबूर हो गए हैं, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, बल्कि सदियों पुरानी हस्तशिल्प और हस्तकला की परंपरा भी पतन का शिकार हो रही है। पत्र में मांग की गई है कि बुनकरों की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने और उनकी समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए बुनकर आयोग का गठन किया जाए, ताकि जमीनी हकीकत के आधार पर ठोस नीति तैयार की जा सके। अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार ने ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का हवाला देते हुए बताया है कि बुनकरों के उत्थान के लिए 1948 में बिहार राज्य हथकरघा बुनकर सहयोग संघ लिमिटेड, पटना की स्थापना की गई थी। इसके बाद 1960 के दशक में राजेंद्र नगर, पटना में बिहार स्टेट हैंडलूम वीवर्स को-ऑपरेटिव यूनियन लिमिटेड को 99 साल की लीज पर राज्य सरकार द्वारा जमीन प्रदान की गई थी। इसके अलावा 1986 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. बिंदेश्वरी दुबे ने बुनकरों के उत्थान के लिए हैंडलूम क्षेत्र को मजबूत करने के ऐलान किए थे, लेकिन समय के साथ ये संस्थान और योजनाएं पतन का शिकार हो गईं। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि यदि समय रहते सरकारी हस्तक्षेप नहीं किया गया तो बिहार का हैंडलूम उद्योग पूरी तरह से बर्बाद हो सकता है, जिसका सीधा असर लाखों बुनकर परिवारों के रोजगार पर पड़ेगा। अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार ने उद्योग मंत्री से मजबूत मांग की है कि बुनकर समुदाय के हितों की रक्षा, रोजगार की बहाली और हैंडलूम उद्योग के पुनरुद्धार के लिए तत्काल और प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके अलावा अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार (अल-हिंद), पटना ने बिहार में हैंडलूम और बुनकर उद्योग के विकास में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा है कि नीतीश सरकार ने बुनकरों की आर्थिक स्थिति में सुधार और इस उद्योग को सहारा देने के लिए कई ठोस और उल्लेखनीय कदम उठाए हैं। अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार की ओर से जारी बयान में बताया गया है कि वर्ष 2005 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बुनकरों के हित में पहला बड़ा कदम उठाते हुए लगभग 15 हजार बुनकरों से संबंधित बकाया (कर्ज/देनदारी) को माफ कर दिया, जिससे बुनकर समुदाय को बड़ी राहत मिली। बयान में कहा गया है कि भागलपुर हैंडलूम मिल के पूर्व बकाया पर आधारित बिजली बिल भी माफ किए गए, जिससे हैंडलूम संस्थानों पर वित्तीय दबाव में उल्लेखनीय कमी आई। इसी तरह स्टेट हैंडलूम कॉरपोरेशन को शीर्ष (एपेक्स) संस्था घोषित किया गया, जिसके माध्यम से सरकारी स्तर पर खरीदारी के आदेश जारी किए गए, ताकि बुनकरों द्वारा तैयार की गई उत्पादों को निश्चित बाजार मिल सके। अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार के अनुसार बुनकर उद्योग के विकास के लिए बिहार सरकार की ओर से चार करोड़ रुपये की बड़ी राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों और सरकारी अस्पतालों में हैंडलूम उत्पादों के उपयोग को अनिवार्य करने का नोटिफिकेशन जारी किया गया, जिससे स्थानीय बुनकरों को लाभ हुआ। बयान में आगे कहा गया है कि बुनकरों की आवश्यकताओं के अनुसार ऋण (लोन) की सुविधाएं प्रदान की गईं और साथ ही कार्यशील पूंजी का प्रबंधन किया गया, ताकि व्यवसाय को विस्तार दिया जा सके। बड़े पैमाने पर हैंडलूम बुनकरों को कच्चा माल (रॉ मैटेरियल) भी वितरित किया गया। विशेष रूप से महिलाओं के संबंध में बताया गया कि सरकार ने अधिक से अधिक महिलाओं को हैंडलूम उद्योग से जोड़ने के कदम उठाए, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता मिली और लिंग समानता को मजबूती मिली। आज हैंडलूम सहकारी समितियों में महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी और नेतृत्व देखा जा सकता है। अमारत-ए-अहल-ए-अन्सार के अध्यक्ष मौलाना शाहिद अन्सारी ने कहा कि नीतीश कुमार के ये कदम न केवल बुनकर समुदाय के लिए आशा की किरण हैं बल्कि बिहार की पारंपरिक हैंडलूम उद्योग के संरक्षण और विकास में भी मील का पत्थर हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि इन योजनाओं को और विस्तार देकर बुनकरों को स्थायी आधार पर आर्थिक स्थिरता प्रदान की जाए।