नेताजी सुभाषचंद्र बोस कॉलेज के उर्दू विभाग में विदाई समारोह एवं मुशायरा आयोजित किया गया
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मुजफ्फरपुर: 08 जनवरी (प्रेस रिलीज) मेहनती छात्रों को मंजिलें स्वयं तलाश लेती हैं। नतीश्वर कॉलेज के उर्दू विभाग से निकलकर देश की प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र इसका जीता जागता प्रमाण हैं। यह कॉलेज के लिए गर्व की बात है कि यहां के छात्र सफलताओं के झंडे गाड़ रहे हैं। इन विचारों का प्रकटीकरण नतीश्वर कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. परमोद कुमार ने विदाई समारोह में संबोधन करते हुए किया। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली से आए छात्रों का सम्मान किया साथ ही विभाग के सभी पूर्व छात्रों को शुभकामनाओं और दुआओं से नवाजा। उर्दू विभाग के अध्यक्ष कमरान घनी सबा ने कहा कि विभाग के छात्रों ने अपनी मेहनत, लगन और शौक और जुनून से नतीश्वर कॉलेज के उर्दू विभाग को राष्ट्रीय स्तर पर एक पहचान दिलाई है। विभाग से एक साथ इतने सारे छात्रों की सफलता हम सभी के लिए गर्व और आनंद का कारण है। इस अवसर पर विभाग के पूर्व छात्र असलम रहमानी, रुकिया खातून, रबिया खातून, आयशा खातून और संजीदा खातून ने अपने अनुभवों का प्रकटीकरण करते हुए कहा कि विभाग और कॉलेज के माहौल और शिक्षकों की देखरेख ने उन्हें जेएनयू तक पहुंचने में मदद की। विदाई समारोह का संचालन नगमा परवीन और महविश नाज ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में आफरीन परवीन, तस्नीम फातिमा, मोहम्मद आरिफ, अबु तल्हा कासिम और अन्य छात्रों ने अपने अनुभवों और कविताओं को प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के दौरान उर्दू विभाग के पूर्व छात्र असलम रहमानी की पुस्तक "नक्श-ए-अदब" का लोकार्पण सम्मानित अतिथियों के हाथों हुआ। प्रिंसिपल प्रोफेसर परमोद कुमार ने कहा कि कॉलेज के किसी छात्र की पुस्तक का प्रकाशन बिहार सरकार के वित्तीय सहयोग और अनुमोदन से हो तो यह हम सभी के लिए गर्व की बात है। इस अवसर पर प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉ. परमोद कुमार की अध्यक्षता और प्रसिद्ध कवि जमील अख्तर शफीक के संचालन में एक भव्य मुशायरा भी आयोजित हुआ। जिसमें असद रिजवी, खलीलुर्रहमान कासमी, डॉ. पंकज कर्ण, डॉ. आरती, कमरान घनी सबा, रुकिया मुजफ्फरपुरी, उसामा घनी, और हेमचंद्र दीपक ने अपनी कविताएं प्रस्तुत कीं। विदाई समारोह और मुशायरे में डॉ. अमरजीत सिंह, डॉ. कस्ले किशोर, शशि कुमार पासवान, डॉ. पूजा गुप्ता, डॉ. बेबी कुमारी, डॉ. रीना झा, डॉ. अजीत कुमार, डॉ. हुसैन दिलशाद, मुफ्ती अरफान कासमी, मुफ्ती नज़रुल हुदा कासमी, वसीम गाजी, सहित शिक्षकों, रिसर्च स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। मुशायरे में प्रस्तुत की गई कविताओं का चयनित अंश प्रस्तुत है: प्रोफेसर परमोद कुमार लगी है आग जमाने में फिर बचा क्या है अगर मैं बच गया फिर बोलिए जला क्या है असद रिजवी चिराग रख के हवेली पे घर से निकला हूं सुना है रास्ते में सरफरी हुआ भी है खलीलुर्रहमान कासमी जिंदगी तुझको समझने में बहुत देर लगी क्या बताएं कि समझने में लगा क्या क्या कुछ कमरान घनी सबा आइने में किस को देखते रहते हो मेरी आंखों में भी तुम हो देखो ना जमील अख्तर शफीक पेशानी पर पसीना देख कर मैं कांप जाता हूं मेरी मां बैठ कर चूल्हे पे जब खाना बनाती है डॉ. पंकज कर्ण मुश्किल में लग रहा है यह अमन और अमान क्या वहशी के हाथ लग गया गीता, कुरान क्या डॉ. आरती कुमारी नश्क-ए-निगाह में रखना आसमान का अरमान अगर है दिल में ऊंची उड़ान का उसामा घनी बेकरारी में तसव्वुर का यह आलम है मेरी दीवार पे कुछ नक्श बना लेता हूं रुकिया मुजफ्फरपुरी हसीन चन-चन के टपकता है गजल होती है शब्ला-ए-इश्क भड़कता है गजल होती है