दरभंगा के दियारा बंधौली की साजिदा परवीन ने महज 52 दिनों में कुरआन मजीद हिफ्ज कर हाफिजा बन गई।
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कुरआन मजीद जैसी पवित्र पुस्तक को हिफ्ज करने से न केवल जन्नतुल फिरदौस का हकदार बनते हैं बल्कि माता-पिता का भी नाम रोशन होता है: उलमा कराम दरभंगा (अरफान अहमद पैदल) जाले ब्लॉक क्षेत्र के दीवार बंधोली निवासी साजिदा परवीन ने नए पीढ़ी की छात्राओं के लिए एक मिसाल कायम की है, क्योंकि उन्होंने महज 52 दिनों के भीतर ही कुरआन मजीद को हिफ्ज करके हाफिजा बन गई हैं। दुनियावी शिक्षा प्राप्त करके अगर कोई व्यक्ति कोई उच्च पद प्राप्त करता है तो पूरे गांव और समाज जिले और प्रदेश में उसकी बहुत प्रसिद्धि होती है, इस छात्र-छात्राओं और उनके परिवार की प्रशंसा होती है और प्रशंसा करने वालों का तांता लग जाता है, लेकिन अगर कोई कम उम्र की लड़की महज 52 दिनों में पूरा कुरआन मजीद हिफ्ज कर लेती है तो उसकी इतनी प्रशंसा नहीं होती जितनी होनी चाहिए। हर व्यक्ति नाम और शोहरत की ओर भागा जा रहा है, जबकि कुरआन मजीद जैसी पवित्र पुस्तक को कोई हिफ्ज कर ले तो इससे बड़ी सफलता समाज और समुदाय के लिए क्या हो सकती है जो कि कयामत के दिन सिफारिश का हकदार होगा। इस हकीकत को अमली जामा पहनाने में साजिदा परवीन ने एक मिसाल कायम की है। दीवार बंधोली की साजिदा परवीन ने जो एक आलिमा फाजिला की शिक्षा प्राप्त करने के साथ-साथ महज 52 दिनों में पूरा कुरआन मजीद हिफ्ज करने का शरफ हासिल किया है। साजिदा परवीन के पिता मौलाना शफीक कासमी ने प्रतिनिधि को जानकारी देते हुए बताया कि उनकी बेटी आलिमियात की शिक्षा प्राप्त करने के बाद दार्स-तद्रीस से जुड़ गई थी, लेकिन इस साल उसके दिमाग में एक बात आई कि बिना कुरआन के हिफ्ज किए आलिमियात की योग्यता में सुधार नहीं आएगी, इसलिए उन्होंने कुरआन मजीद को हिफ्ज करने का फैसला किया और छह पारे मेरी निगरानी में सुनाया, इसके बाद मदरसा इस्लाहुल बानात सोभन दरभंगा में कारी मोहम्मद कैस इसलाही की निगरानी में पूरा करने का शरफ हासिल किया। इस अवसर पर मदरसे में एक दुआ कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें कुल तीन लड़कियों ने कुरआन मजीद हिफ्ज करने की सौभाग्यता हासिल की। अवसर पर मदरसे के रूह-रवां मौलाना एजाज अहमद, पूर्व चेयरमैन बिहार स्टेट मदरसा एजुकेशन बोर्ड पटना, मदरसा हदा की प्रिंसिपल महोदया सवरत अफरोज, इंजीनियर मोहम्मद फखरुद्दीन, मौलाना नियाज अहमद सलफी, मौलाना मुनहज अहमद मुफ्ताही, मौलाना एहसान कासमी, मौलाना शहजाद, मास्टर अब्दुल खालिक, मास्टर मोहम्मद आयूब, मास्टर मोहम्मद मुक्तार ने सभी छात्राओं को बेहतर मुस्तकबिल के लिए दुआओं से नवाजा।