नई पीढ़ी के विकास के लिए शिक्षा को प्राथमिकता और मजबूत हथियार बनाने की आवश्यकता: नज़रुल इस्लाम
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मिश्कात शरीफ में अमीर-ए-शरीयत, शैक्षिक नेतृत्व और राजनीतिक व सामाजिक हस्तियों की गरिमामय उपस्थिति पटना: नेहसा, फुलवारीशरीफ, पटना में स्थित केंद्रीय अलूम्स एंग्लो अरबिक अकादमी में वार्षिक शैक्षिक और समापन समारोह के साथ अंतिम मिश्कात शरीफ का आयोजन बहुत ही गरिमामय और सम्मानजनक तरीके से हुआ। इस गरिमामय कार्यक्रम में जनाब नज़रुल इस्लाम, जेडीयू के सदस्य और ऑल इंडिया मुस्लिम जागरण मोर्चा के अध्यक्ष ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। समारोह में अमीर-ए-शरीयत, बिहार, ओडिशा और झारखंड के अमीर-ए-शरीयत हजरत मौलाना अनीसुर रहमान कासमी साहब, अलकरीम यूनिवर्सिटी और कटिहार मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन अहमद अशफाक करीम साहब, दैनिक कौमी तनजीम पटना के मालिक अशरफ फरीद साहब, दैनिक अमीन पटना के मालिक नोशाद साहब, मुफ्ती सुहैल कासमी साहब (अमीर-ए-शरीयत के अध्यक्ष), श्याम रजक जी (फुलवारीशरीफ विधायक), खालिद अनवर साहब (एमएलसी), हाफिज अबू शम्मा साहब, मौलाना असद रशीद नदवी साहब, जकी अहमद दिल्लो साहब सहित बड़ी संख्या में राजनीतिक और सामाजिक नेता और सम्मानित उलेमा उपस्थित हुए। अपने संबोधन में जनाब नज़रुल इस्लाम ने कहा कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा एक मजबूत भविष्य की नींव है, जो कभी मकतबी प्रणाली के माध्यम से प्रदान की जाती थी, लेकिन अफसोस कि आज यह प्रणाली बड़े पैमाने पर बंद हो गई है। ऐसे में मौलाना शब्ली कासमी साहब द्वारा केंद्रीय अलूम्स एंग्लो अरबिक अकादमी जैसे संस्थानों की स्थापना बहुत ही प्रशंसनीय है, जो बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर सही दिशा और मजबूत शैक्षिक आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने अफसोस व्यक्त किया कि ऐसे संस्थानों को खुलकर सहयोग नहीं मिल पाता है, जबकि उनके संस्थापक अपनी व्यक्तिगत पूंजी से राष्ट्र के भविष्य को संवारने का प्रयास कर रहे हैं, जिसकी भरपूर प्रोत्साहन मिलनी चाहिए। केंद्रीय अलूम्स एंग्लो अरबिक अकादमी, नेहसा, फुलवारीशरीफ, पटना एक बहु-आयामी शैक्षिक संस्थान है, जहां दीनी और आधुनिक शिक्षा का सुंदर मेल पेश किया जाता है। संस्थान में आलिमीयत (आलिम कोर्स), इंटरमीडिएट, कुरान की हिफ्ज, मैट्रिक और जूनियर स्कूलिंग की शिक्षा दी जाती है, ताकि छात्रों को प्रारंभिक स्तर से उच्च दीनी और आधुनिक शिक्षा तक एक समान और मजबूत आधार प्रदान किया जा सके। संस्थान का उद्देश्य ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो ज्ञान, चरित्र और जागरूकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थान प्राप्त करे। जनाब नज़रुल इस्लाम ने आगे कहा कि राष्ट्र की पिछड़ेपन का सबसे बड़ा कारण शिक्षा में पिछड़ना है। सरकारी और एजेंसी रिपोर्टों के अनुसार केवल ढाई से साढ़े तीन प्रतिशत मुस्लिम बच्चे ही मानक शिक्षा से जुड़े हुए हैं, जो बहुत ही चिंताजनक है। जब तक हम शिक्षा को अपनी पहली प्राथमिकता और मजबूत हथियार नहीं बनाते हैं, न तो हमारी नई पीढ़ी आगे बढ़ सकती है और न ही सामाजिक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन संभव हो पाएगा। उन्होंने राष्ट्र से अपील की कि ऐसे संस्थानों का खुलकर सहयोग किया जाए। समारोह के समापन पर संस्थान की निरंतर प्रगति, शैक्षिक मानकों के प्रचार और छात्रों की सर्वांगीण सफलता के लिए शुभकामनाएं व्यक्त की गईं।