मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026
اردوहिन्दीEnglish
आवाज़ ए बिहार

आवाज़ ए बिहार

ई-पेपर
टॉप स्टोरीज़राष्ट्रीयराजनीतिखेलबिहारराष्ट्रीयराजनीतिखेललेखविश्व समाचारऔर
  • टॉप स्टोरीज़
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • खेल
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • खेल
  • लेख
  • विश्व समाचार
  • टॉप
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • खेल
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • खेल
  • लेख
आवाज़ ए बिहार
  • होम
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • खेल
  • बिहार
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • खेल
  • लेख
  • विश्व समाचार
  • ई-पेपर
  • हमारे बारे में
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • नियम और शर्तें
اردوहिन्दीEnglish

आवाज़ ए बिहार

बिहार की आवाज़ — उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी में ताज़ा खबरें

श्रेणियाँ

  • स्थानीय
  • राष्ट्रीय
  • राजनीति
  • व्यापार
  • प्रौद्योगिकी
  • खेल
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा

त्वरित लिंक

  • होम
  • ई-पेपर
  • हमारे बारे में
  • संपर्क करें
  • गोपनीयता नीति
  • नियम और शर्तें

न्यूजरूम

  • संपादकीय नीति
  • सुधार और शिकायतें
  • विज्ञापन
  • न्यूजरूम संपर्क

भाषाएँ

  • اردو (Urdu)
  • हिन्दी (Hindi)
  • English

हमें फॉलो करें

सदस्यता लें

Email: awazebihar@gmail.com|Phone: +91-9473486854

© 2026 Awaz E Bihar Publications. सर्वाधिकार सुरक्षित

Designed and Developed byZeloiteZeloite
के वाई सी आतंक का राज! पहचान के नाम पर सरकारी शिकंजा, आम आदमी कागजों में कैद, नज़हत जहां
  1. होम
  2. बिहार
बिहार

के वाई सी आतंक का राज! पहचान के नाम पर सरकारी शिकंजा, आम आदमी कागजों में कैद, नज़हत जहां

Awaz E Bihar•26 दिसंबर 2025 को 12:59 pm बजे•2 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें

क्या अब जीने के लिए भी सरकारी अनुमति आवश्यक है?

मुजफ्फरपुर (प्रतिनिधि)

देश का आम नागरिक आज नागरिक नहीं रहा, बल्कि हर पल एक संदिग्ध अभियुक्त बना दिया गया है। जीवन के हर मोड़ पर एक ही सवाल, पहले अपनी पहचान साबित करो, फिर जीने का अधिकार मांगो! पूर्व जिला परिषद उम्मीदवार और शैक्षिक केंद्र की प्रदेश उपाध्यक्ष नज़हत जहां ने केवाईसी प्रणाली पर जोरदार और आक्रामक हमला बोलते हुए कहा कि "सरकार ने केवाईसी को सुविधा नहीं, सजा बना दी है। यह डिजिटल सुधार नहीं बल्कि खुली डिजिटल तानाशाही है।"

आधार, पैन, राशन कार्ड, गैस सिलेंडर, बैंक खाता, मोबाइल सिम हर सुविधा पर एक ही आदेश सुनाई देता है: पहले केवाईसी, बाद में अधिकार! नज़हत जहां ने कहा कि केवाईसी की एक छोटी सी गलती पूरे घर को बर्बाद कर देती है किसी गरीब का राशन बंद, किसी बुजुर्ग की पेंशन रोक दी गई, किसी मजदूर का गैस सिलेंडर अटक गया, किसी महिला का बैंक खाता फ्रीज, और एकमात्र कारण? केवाईसी नहीं हुआ! उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में हालात अत्यंत भयावह हैं। कहीं नेटवर्क फेल, कहीं सर्वर डाउन, कहीं अंगूठा मशीन से मैच नहीं करता, कहीं खुद मशीन जवाब दे देती है, लेकिन सजा हमेशा इंसान को ही मिलती है, नज़हत जहां ने प्रणाली से टकराते हुए तीखे सवाल उठाए:

अगर आधार पहचान है तो बार-बार केवाईसी क्यों?
अगर गलती मशीन की है तो सजा इंसान को क्यों?
पहले भूख मिटाई जाए या पहले पहचान साबित की जाए?
नज़हत जहां ने दो टूक शब्दों में कहा: "निगरानी के नाम पर सरकार आम आदमी की आजादी पर हमला कर रही है। आज हालात यह हैं कि भूख से ज्यादा डर केवाईसी का है। राशन से ज्यादा जरूरी पहचान हो गई है, और जीवन से ज्यादा जरूरी एक नंबर!" जनता में गुस्सा उबाल पर है। लोग सवाल कर रहे हैं: "क्या सरकार योजनाएं देने आई थी या अधिकार छीनने?" अंत में नज़हत जहां ने सबसे बड़ा और खतरनाक सवाल खड़ा किया, क्या भारत का आम नागरिक अब इंसान नहीं रहा, सिर्फ एक केवाईसी नंबर बनकर रह गया है? यह सिर्फ एक खबर नहीं है, जनता की चीख है— जो अब कागजों, नंबरों और मशीनों के बीच दम तोड़ रही है!
साझा करें:

संबंधित समाचार

बिरयानी खाएँ, लेकिन हिंदू दुकानों से', बंगाल में दुर्गा पूजा के मौके पर लगाए गए नफरत भरे पोस्टर
बिहार

बिरयानी खाएँ, लेकिन हिंदू दुकानों से', बंगाल में दुर्गा पूजा के मौके पर लगाए गए नफरत भरे पोस्टर

Awaz E Bihar•13 अक्टूबर 2026•Updated•0 व्यूज़
गार्डन सिटी के अलावा कहीं भी धरना दिया तो कानूनी कार्रवाई होगी
बिहार

गार्डन सिटी के अलावा कहीं भी धरना दिया तो कानूनी कार्रवाई होगी

Awaz E Bihar•12 अक्टूबर 2026•13 व्यूज़
समरत चौधरी ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में राहत राशि ट्रांसफर की
बिहार

समरत चौधरी ने बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में राहत राशि ट्रांसफर की

Awaz E Bihar•12 अक्टूबर 2026•27 व्यूज़