मुफ्ती एजाज अहमद साहब एक नेक नौजवान आलिम-ए-दीन थे : मुफ्ती वसी अहमद कासमी
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अमीरात शरिया में आयोजित संवेदना सभा से उलेमा का संवेदना व्यक्त करना
जामिया रहमानी खानकाह मुंगेर के प्रख्यात सलाह अलम दीन अस्ताद हदीस हजरत मौलाना मुफ्ती एजाज अहमद साहब रहमानी कासमी देवबंद से दिल्ली जाते समय रास्ते में एक कार दुर्घटना में इंतकाल कर गए, दरअसल मुफ्ती साहब हजरत आलमा अनवर शाह कश्मीरी पर आयोजित विश्व सेमिनार में भाग लेने के लिए देवबंद तशरीफ ले गए थे, १४ दिसंबर की शाम दिल्ली लौट रहे थे कि अचानक उनकी गाड़ी मेरठ के पास दुर्घटना का शिकार हो गई और वे इंतकाल फरमा गए, 'इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिउन' इस दुखद खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया, अमारत-ए-शरिया और जामिया रहमानी मुंगेर का माहौल सोगवार हो गया, अमीर-ए-शरिया मुफकिर-ए-मिल्लत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी साहब ने इस हादसे पर दिली रंज व गम का इज़हार करते हुए अपने ताज़ियती संदेश में फरमाया कि मौलाना एक सलाह नौजवान आलिम दीन थे, उनके विसाल से एक बड़ा इल्मी खला पैदा हो गया है, नाज़िम अमारत-ए-शरिया बिहार ओडिशा झारखंड मौलाना मुफ्ती मुहम्मद सईदुर रहमान कासमी साहब ने दिली सदमे का इज़हार करते हुए कहा कि मुफ्ती साहब अपनी सलाहियत और सलाहियत और खुदादादी की वजह से असातिज़ और तलबा में हर दिल अजीज़ रहे, अल्लाह तआला उनकी मगफिरत फरमाए और उनके दरजात को बुलंद करे, उनके विसाल पर अमारत-ए-शरिया में एक ताज़ियती निशिस्त कायम मुकाम नाज़िम मौलाना मुफ्ती वासी अहमद कासमी साहब नائب काज़ी शरिया अमारत-ए-शरिया की सदारत में आयोजित हुई जिसमें उन्होंने कहा कि आप एक कामयाब मुअल्लिम और मुदर्रिस की हैसियत से इल्मी हलकों में मुतआरिफ थे, चालीस की उम्र में उन्होंने जो इल्मी दीनी और तालीमी खिदमात अनजाम दीं वो बरसों याद रखे जाएंगे और इसके गहरे अनमट नुकूस दर्ज होंगे, मौलाना पूर्णिया के बाशिंदा और साहब-ए-करदार और फाज़िल आलिम दीन थे, बिलाशुबा आप की वफात से मिल्लत एक मुखलिस और साहब-ए-करदार फर्द जليل से महरूम हो गई, मौलाना रिजवान अहमद नदवी मुआविन नाज़िम ने कहा कि मुफ्ती साहब नihत मुतवाज़िल और खुशमिजाज आलिम दीन थे, उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी आलिमाना शान और दावयाना करदार के साथ गुजारी, मौलाना मुहम्मद मुजीबुर रहमान कासमी नائب काज़ी शरिया ने कहा कि मुफ्ती साहब के सानिहा इर्तिहाल से हमें इबरत हासिल करनी चाहिए कि इंसान की जान और माल सब अल्लाह की अमानत है, कब अल्लाह की तरफ से मुतालबा हुआ और उसके हुजूर पेश कर दिया जाए, इसलिए इसके लिए तैयार रहना चाहिए, मौलाना मुहम्मद अरशद रहमानी साहब आफिस सेक्रेटरी ने कहा कि मौत एक अतल हकीकत है जिसका जो वक्त मुकर्रर है वो रब के सामने हाजिर हो जाएगा, मौलाना का वीडियो सुन रहा था उनकी तकरीर से दिल मुतासिर हो रहा था मगर अचानक उनके इंतकाल की खबर से कबीदा खयाल हुआ, मौलाना मुहम्मद शमीम अक्रम रहमानी साहब मुआविन काज़ी शरिया ने कहा कि मौलाना से मेरी दीरिना मुलाकात रही है और अक्सर इल्मी मसलों पर मुजाकिरे भी होते रहे हैं, उनका इल्म गहरा और इल्म पक्का था, मौलाना अबुल कलाम शमसी साहब मुआविन नाज़िम अमारत-ए-शरिया ने कहा मौलाना बड़े अज़म और हौसले के आलिम दीन थे, हालिया दिनों में उनसे खानकाह रहमानी में मुलाकात हुई, उनके हौसला अफज़ा कालम से मुझे बड़ी ताकत मिली, मौलाना मुहम्मद मर्सल साहब ने कहा कि मौलाना खुशगuftार और खुशमिजाज आलिम दीन थे, जब भी उनसे मुलाकात हुई खंदा रुई से मिलते जुलते रहे, मौलाना मुहम्मद शारिक रहमानी रफीक दफ्तर निजामत ने कहा कि मौलाना मेरे शफीक अस्ताद और मुरब्बी और रहनुमा थे, वो तलबा और असातिज़ में हर दिल अजीज़ रहे, अक्सर जरूरतमंद तलबा की माली मदद भी फरमाते थे, अफसोस के उनके विसाल से हम एक शफीक अस्ताद से महरूम हो गए, मौलाना मुहम्मद सबीर हुसैन कासमी साहब ने कहा कि मौलाना बड़े रक-रखाव के आलिम दीन थे, तकल्लुफात से आरी थे, अमारत-ए-शरिया के जिस मेहमान खाने में ठहराया जाता वहीं कयाम फरमाते थे, इस ताज़ियती निशिस्त में दरुल उलूम इस्लामिया के मोअरर अस्ताद जनाब मौलाना नीरुल इस्लाम के वालिद जनाब महबूब आलम साहब, अमारत-ए-शरिया के एक बड़े मुखलिस जनाब अलहाज शफीउर रहमान साहब सोपोल, मौलाना फियाज अहमद साहब मधुबनी रुकन शूरा अमारत-ए-शरिया और जिला सहरसा के एक समाजी खिदमतगार जनाब अब्दुल गफ्फार साहब लल्लजी के सानिहा इर्तिहाल पर भी गहरा रंज व गम का इज़हार किया गया और इन तमाम मरहूमीन के लिए जमाअतन इصال-ए-सवाब का एहतिमाम किया गया और दुआ-ए-मगफिरत की गई, अल्लाह तआल