मोहम्मद अतहर हुसैन के हत्यारों को फांसी की सजा दी जाए और मृतक के वारिसों को पचास लाख रुपये और विधवा को नौकरी दी जाए
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बिहार की संयुक्त संगठनों की साझा प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बिहार सरकार से पुरजोर मांग
पटना : (एबीएन) केंद्रीय कार्यालय, अमारत-ए-शरिया, फुलवारी शरीफ पटना में बिहार की मिली संगठनों - अमारत शरिया बिहार, ओडिशा, झारखंड जमात-ए-इस्लामी हिंद (बिहार), जमीयत उलेमा-ए-हिंद (बिहार अल्फ), जमीयत उलेमा-ए-हिंद (बिहार मीम), इदरा शरिया (डॉ. फरीद अमानुल्लाह), आल इंडिया मोमिन कॉन्फ्रेंस (बिहार) मध्य जमीयत अहल-ए-हदीस (बिहार) और मजलिस-ए-उलमा खुतबा इमामिया (अहल-ए-तशिया) - ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें बिहार शरीफ के निवासी मोहम्मद अतहर हुसैन की मॉब लिंचिंग पर गहरा दुख और चिंता व्यक्त की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि 5 दिसंबर 2025 को नवादा जिले के रोह थाना क्षेत्र के भट्टा गांव में कुछ समाज विरोधी तत्वों ने मोहम्मद अतहर हुसैन पुत्र मोहम्मद आलम को बहुत ही बर्बरता से प्रताड़ित किया। उन्हें पहचान, नाम और धर्म के आधार पर रोका गया, उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, हाथ-पैर बांधकर बंद कमरे में ले जाया गया और लोहे की सलाखों, बिजली के करंट और अन्य बर्बर तरीकों से इतनी प्रताड़ना की गई कि वे गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में 12 दिसंबर 2025 को पावापुरी सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मिली संगठनों के प्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर स्थिति का विस्तृत जायजा लिया। पता चला कि मृतक एक मेहनती और शांतिपूर्ण नागरिक थे, जो कपड़े बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे। वे चार भाइयों में सबसे बड़े थे और मेहनती और ईमानदार व्यक्ति थे। घटना के बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक विनाश टूट पड़ा है और वे गहरे असुरक्षा और भय के माहौल में जीवन गुजारने के लिए मजबूर हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी स्पष्ट किया गया कि हिंसा के बाद आरोपियों ने सच्चाई को विकृत करने और खुद को निर्दोष साबित करने के लिए संगठित साजिश के तहत झूठा बयानबाजी किया, और मृतक के खिलाफ फर्जी एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश की। इसके बावजूद परिवार ने कानूनी तरीके से 6 दिसंबर 2025 को 10 नामजद और 5 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया, जिसमें अब तक कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, हालांकि कुछ असली अपराधी अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं।
मिली संगठनों ने इस तथ्य पर गहरी चिंता व्यक्त की कि मृतक की पत्नी और तीन नाबालिग बच्चे - जो शिक्षा के चरण में हैं - इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद पूरी तरह से बेसहारा हो गए हैं। परिवार का एकमात्र आय का स्रोत समाप्त हो गया है और भविष्य गंभीर अनिश्चितता का शिकार है। इसके साथ-साथ पीड़ित परिवार को अभी भी जान और माल के खतरे हैं, जिसके कारण वे डर और दबाव के माहौल में जीवन गुजार रहे हैं।
मिली संगठनों ने संयुक्त प्रेस बयान में कहा कि यह घटना केवल एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान, कानून की सर्वोच्चता और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर हमला है। यदि ऐसे अपराधों के खिलाफ निर्णायक और सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है, तो समाज में नफरत, हिंसा और कानूनविहीनता को बढ़ावा मिलेगा, जिसके परिणाम बहुत खतरनाक होंगे।
मिली संगठनों ने स्पष्ट किया कि मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएं न केवल अल्पसंख्यकों बल्कि पूरे समाज की शांति, स्थिरता और बिहार की सुरक्षा और विकास के लिए गंभीर खतरा हैं। यदि राज्य स्तर पर मॉब लिंचिंग की रोकथाम के लिए प्रभावी और मजबूत कदम उठाए जाएं तो ...
मांगें
बिहार राज्य सरकार से मांग की जाती है कि:
१. इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराई जाए और मॉब लिंचिंग में शामिल अपराधियों को फांसी की सजा दी जाए ताकि आगे से ऐसे अपराधों की रोकथाम हो सके।
२. जो आरोपी अभी भी फरार हैं उन्हें तत्काल गिरफ्तार कर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत सख्त सजा दी जाए।
३. मृतक के वारिसों को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए ताकि परिवार की आर्थिक बहाली संभव हो सके।
४. मृतक की पत्नी को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए ताकि परिवार की स्थायी देखभाल हो सके।
५. मृतक के तीनों बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण की पूरी जिम्मेदारी सरकार उठाए।
६. राज्य में बढ़ती कानूनविहीनता और गुंडागर्दी पर काबू पाने के लिए पुलिस और प्रशासन को और अधिक प्रभावी, जवाबदेह और चौकस बनाया जाए।
७. आगे से ऐसी निंदनीय घटना न हो इसको सुनिश्चित किया जाए।