जमीनी विवाद के नाम पर अब न तो थानों की मनमानी चलेगी और न ही पुलिस की दखलंदाजी : विजय सिन्हा
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पटना (एबीएन) उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा है कि जमीनी विवादों के नाम पर अब न तो थानों की मनमानी चलेगी और न ही पुलिस की दखल का सहारा लेकर किसी को डराया जाएगा। दोहरी इंजन वाली सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जमीन के विवाद राजस्व और न्यायिक प्रक्रिया का मामला है, न कि पुलिस की मनमानी का। भूमि सुधार और जनकल्याण संवाद के दौरान बार-बार यह बात सामने आई है कि कई मामलों में पुलिस ने शांति और सुरक्षा के नाम पर अनावश्यक दखल दी है। यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस की जिम्मेदारी केवल शांति और सुरक्षा बनाए रखना है, न कि अतिक्रमण, कब्जा या निर्माण की सुविधा प्रदान करना। इन दिशानिर्देशों पर अमल करना आवश्यक है। यदि अधिकृत प्राधिकरण के आदेशों के बिना अतिक्रमण, बाउंड्री वाल का निर्माण या निर्माण से संबंधित कोई शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य न्याय और जनता का सम्मान है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का 7 निश्चय 3 के तहत 'सबका साथ, जीवन आसान' केवल नारा नहीं है, बल्कि जमीन पर दिखना चाहिए। जमीन विवाद मामले का समाधान कानून के दायरे में रहते हुए समय पर और न्यायपूर्ण तरीके से किया जाएगा। जनता को भटकने नहीं दिया जाएगा और दोषियों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा। पुलिस का अब जमीनी विवादों में सीमित भूमिका होगी। उनकी दखल शांति और सुरक्षा बनाए रखने तक सीमित रहेगी। भूमि सुधार और जनकल्याण संवाद के दौरान प्राप्त शिकायतों का विश्लेषण करने के बाद राज्य सरकार ने सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं। नए नियम 1 फरवरी से लागू होंगे। अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी और प्रधान सचिव सी के अनिल की ओर से जारी एक संयुक्त पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जमीनी विवादों के मामलों में पुलिस की भूमिका शांति और सुरक्षा बनाए रखने तक सीमित रहेगी। पुलिस किसी भी भूमि पर कब्जा नहीं कर सकेगी और न ही अधिकृत प्राधिकरण की अनुमति के बिना कोई निर्माण या बाउंड्री वाल बना सकेगी। दिशानिर्देशों के अनुसार किसी भी जमीनी विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस स्टेशन को स्टेशन डायरी में अलग और स्पष्ट प्रविष्टि करनी होगी। इसमें पक्षों के नाम और पते, विवाद की प्रकृति, विवादित भूमि की पूरी जानकारी, विवाद का संक्षिप्त विवरण और पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक कार्रवाई शामिल होगी। यह भी स्पष्ट करना आवश्यक होगा कि पहली बार मामले पर कौन सी राजस्व अदालत का अधिकार क्षेत्र है। संबंधित थाना प्रभारी को जमीन के प्रत्येक विवाद के संबंध में लिखित जानकारी सर्कल अधिकारी को प्रदान करने की आवश्यकता होगी। यह जानकारी ईमेल या सरकारी पोर्टल के माध्यम से भी भेजी जा सकती है, ताकि राजस्व और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल को आसान बनाया जा सके। जमीनी विवादों के त्वरित समाधान के लिए सर्कल अधिकारी और थाना प्रभारी की संयुक्त बैठक प्रत्येक सप्ताह सर्कल कार्यालय में आयोजित की जाएगी। इन बैठकों में मामलों के समाधान की प्रगति आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 22 जुलाई 2025 को हुए समीक्षा बैठक के निर्देशों के अनुसार थाना प्रभारी स्वयं या उनकी अनुपस्थिति में अतिरिक्त थाना प्रभारी इन बैठकों में भाग लेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 107/116 के तहत पुलिस की भूमिका पहले की तरह ही रहेगी, लेकिन जमीनी विवादों में अनावश्यक दखल के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार 'सबका साथ, जीवन आसान' को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया है।