रेलवे आम आदमी के आरामदायक सफर पर भी पर्याप्त ध्यान दे: विपक्ष
Awaz E Bihar••4 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें
लोकसभा में विपक्ष ने आम आदमी के लिए अधिक ट्रेनें चलाने और उन्हें यात्रा के दौरान उचित सुविधाएं प्रदान करने की मांग की है। वर्ष 2026-27 के लिए रेलवे के अनुदान की मांग पर जारी चर्चा में भाग लेते हुए, तृणमूल कांग्रेस की शताब्दी राय ने मंगलवार को कहा कि मजदूरों और आम लोगों के लिए ट्रेनें चलाई जानी चाहिए और इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि उन्हें यात्रा के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि तत्काल टिकट लेने वाले निचली सीट रिजर्व करा लेते हैं जबकि पहले से रिजर्वेशन करने में बुजुर्गों को ऊपर की सीट मिलती है। पैसे वाले लोग आरामदायक यात्रा करते हैं जबकि आम आदमी को यात्रा के दौरान परेशानियों का सामना करना पड़ता है। श्रीमती राय ने कहा कि बुजुर्गों के लिए निचली बर्थ ही रिजर्व करने का प्रावधान किया जाना चाहिए। 80 वर्ष से अधिक लोगों के लिए भी ऊपर की सीट रिजर्व कर दी जाती है। इससे उन्हें बहुत परेशानी होती है। ऊपरी बर्थों पर चढ़ते समय उनके गिरने और घायल होने की भी खबरें आई हैं। उन्होंने बुजुर्ग नागरिकों के लिए किराए की रियायतें बहाल करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि ट्रेनों में स्थानीय वेंडर खाना सप्लाई कर रहे हैं, जो कि घटिया क्वालिटी का है और इसमें स्वच्छता की कमी है। श्रीमती राय ने कहा कि रेलवे रिजर्वेशन के लिए वेटिंग लिस्ट में शामिल टिकट रद्द करने पर भी पैसे काट रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। लोक जन शक्ति पार्टी (राम विलास पासवान) के अरुण भारद्वाज ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान रेलवे ने अभूतपूर्व काम किया है। रिकॉर्ड संख्या में रेलवे अंडर ब्रिज और ओवर ब्रिज बनाए गए हैं। भ्रष्टाचार का खात्मा हो चुका है और रेलवे अब विकास का पर्याय बन चुका है। कांग्रेस के राज मोहन उन्नीतन ने कहा कि भारतीय रेलवे केवल परिवहन का एक साधन नहीं है। यह देश की लाइफ लाइन है। ट्रेनें आम आदमी को रोजी-रोटी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसके मद्देनजर सरकार को आम आदमी के लिए ट्रेनें चलाने और यात्रा में उन्हें सुविधा हो इस पर ध्यान देना चाहिए। आधुनिक ट्रेन, बुलेट ट्रेन और बड़े स्टेशनों को लेकर बड़ी-बड़ी बातें तो की जाती हैं, लेकिन आम आदमी के लिए ट्रेन चलाने पर भी गंभीर चर्चा की जरूरत है। भाजपा की मालविका देवी ने रेलवे के वर्ष 2026-27 के अनुदान की मांग पर चर्चा में कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र कालाहांडी, ओडिशा में रेलवे के विकास की एक नई परिभाषा लिखी गई है। उन्होंने कहा कि उनके सभी मांगों को प्राथमिकता के आधार पर मंजूरी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने रेलवे की सुरक्षा और गति दोनों को बेहतर बनाने के लिए काम किया है। अमृत स्टेशन योजना के तहत बड़ी संख्या में स्टेशनों का सौंदरीकरण किया गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के मिस्टर अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि औरंगाबाद, बिहार को रेलवे क्षेत्र में क्यों नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र से संबंधित विभिन्न मांगों के संदर्भ में उन्होंने स्वयं रेल मंत्री से मिलकर लिखित अनुरोध किया, लेकिन उनके क्षेत्र की कोई भी समस्या अभी तक हल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान कई स्टेशनों पर मेल और पैसेंजर ट्रेनों के ठहराव को रोक दिया गया था, उसे बहाल किया जाए। इसके अलावा, रेलवे की जो सुविधाएं पहले दिव्यांगों और बुजुर्ग नागरिकों के लिए उपलब्ध थीं, उन्हें बहाल किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि हर मेल और एक्सप्रेस ट्रेन में पांच जनरल कोच शामिल किए जाएं। समाजवादी पार्टी के लक्ष्मी कांत निषाद ने कहा कि सरकार इसे विकासात्मक बजट कहती है, लेकिन सरकार ने नियमित ट्रेनों के सिलसिले में कुछ नहीं किया। रेलवे को निजी हाथों में देकर सरकार बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रही है। उन्होंने मांग की कि बहराइच-खलीलाबाद के बीच बनने वाली रेलवे लाइन को अम्बेडकरनगर से जोड़ा जाए। जनता दल (यूनाइटेड) के डॉक्टर आलोक कुमार सुमन ने कहा कि भारतीय रेलवे केवल परिवहन का साधन नहीं है, बल्कि विकास का आधार है। उन्होंने कहा कि लगभग 2 करोड़ लोग रोजाना रेल के माध्यम से यात्रा करते हैं, इसलिए रेलवे को लाइफ लाइन कहा जाता है। भारतीय रेलवे निरंतर आधुनिक और विश्व स्तरीय बन रही है। उन्होंने मांग की कि उनके संसदीय क्षेत्र गोपालगंज में थावे जंक्शन पर प्लेटफार्म की संख्या में वृद्धि की जाए और स्टेशन पर फुट ओवर ब्रिज बनाया जाए। तेलुगु देशम पार्टी के कृष्णा प्रसाद टीनेटी ने कहा कि रेलवे के बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वित्त पोषण अत