सरस मेले का समापन, मंत्री श्रवण कुमार ने महिला उद्यमियों को सम्मानित किया
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पटना, 04 जनवरी (एबीएन) ग्रामीण उद्योगीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 12 दिसंबर से 04 जनवरी तक आयोजित हुए बिहार सरस मेला रविवार को संपन्न हो गया। बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने आज सरस मेला के दौरान सर्वश्रेष्ठ बिक्री करने वाली महिला उद्यमियों को प्रमाण पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करने वाली महिला उद्यमियों में श्रीमती प्रेम लता देवी, श्रीमती रहमाना, श्रीमती ज्योत्सना कुमारी, श्रीमती कृष्णा देवी, श्रीमती वर्जेश बेगम शामिल हैं। गांधी मैदान में गत 24 दिनों तक आयोजित हुए सरस मेले का आयोजन ग्रामीण विकास विभाग ने 'जीविका' के माध्यम से किया। समापन समारोह में भाग लेने के लिए पहुंचे ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने सरस मेले का दौरा किया और ग्रामीण कारीगरों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों के साथ-साथ इसके सफल आयोजन की प्रशंसा की। इस अवसर पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है जहां मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की गई। उन्होंने कहा कि स्थायी रोजगार योजना भी सबसे पहले बिहार में ही शुरू की गई। उनका कहना था कि इन योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाएं जुड़ रही हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बिहार को देश के शीर्ष पांच राज्यों में शामिल करने के अभियान में कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। जीविका की एडिशनल चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा ने कहा कि सरस मेला अब राष्ट्रीय स्तर का एक बड़ा आयोजन बन चुका है, जिससे बिहार के गौरव में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यहां आकर ग्रामीण महिलाएं अपने कौशल और उद्योगीकरण का प्रदर्शन कर रही हैं और आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त हो रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार ने कहा कि जीविका दीदियों के आर्थिक और सामाजिक विकास की चर्चा अब पूरे देश में हो रही है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने सरस मेले के सफल आयोजन पर जीविका को बधाई दी और खुशी जताई कि बिहार में जीविका का काम प्रशंसनीय है। बिहार ग्रामीण जीविका परजीवन फ्रोमोशन कमिटी (जीविका) की प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर महुआ राय चौधरी ने बताया कि सरस मेले में ग्रामीण महिला उद्यमियों और कारीगरों के सफल उद्यमी बनने की प्रेरक कहानियां प्रस्तुत की गईं। जीविका दीदियों की सफलता की कहानियां अब शोधकर्ताओं के लिए पाठ्यक्रम का हिस्सा भी बन रही हैं। मेले में आकर शोधकर्ता और प्रबंधन की शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र जीविका दीदियों से व्यवसाय में सफलता के गुर सीख रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में सरस मेले के आयोजन और इसकी ओर आने वालों की आकर्षण में निरंतर वृद्धि हो रही है। श्रीमती चौधरी ने आगे बताया कि 24 दिनों के दौरान लगभग 28 करोड़ 52 लाख रुपये से अधिक के उत्पादों और व्यंजनों की खरीद-फरोख्त हुई, जबकि अनुमानित 18 लाख लोगों ने मेले का दौरा किया। 12 दिसंबर से आयोजित हुए बिहार सरस मेले में बिहार के सभी 38 जिलों से लगभग 209 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी जीविका दीदियां माइक्रो उद्यमी के रूप में शामिल हुईं। बिहार के अलावा देश के 25 राज्यों की भागीदारी रही। विभिन्न विभागों, संस्थानों और बैंकों के 50 स्टॉलों के माध्यम से सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के बारे में जानकारी प्रदान की गई।