लैंड फॉर जॉब मामले में लालू प्रसाद यादव के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश फिर स्थगित
Awaz E Bihar••11 व्यूज़•2 मिनट पढ़ें
नई दिल्ली, 4 दिसंबर: दिल्ली की राउज़ अवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर की गई एफआईआर में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के अपने फैसले को फिर से टाल दिया है। विशेष जज विशाल गोगने ने फैसला 8 दिसंबर को सुनाने का आदेश दिया। अदालत ने पहले अपना फैसला 10 नवंबर को स्थगित कर दिया था। अदालत ने 25 अगस्त को सीबीआई केस में आरोप तय करने पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था। गुरुवार की सुनवाई के दौरान लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव उपस्थित नहीं हुए। तीनों की पैरवी करने वाले वकील मनीन्द्र सिंह ने आज अदालत में उपस्थिति से छूट की मांग की, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। लालू प्रसाद यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें इस मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर को रद्द करने और ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई है। हाई कोर्ट इस याचिका पर 25 सितंबर को सुनवाई करेगी। लालू यादव की पैरवी करते हुए कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि मामला चलाने के लिए आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं की गई। नतीजतन, पूरी जांच अवैध है। आवश्यक अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं की जा सकती। सिब्बल ने आगे कहा कि इस मामले में पूरी कार्यवाही में खामी है। सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने कहा कि लालू यादव जानबूझकर ट्रायल कोर्ट में आरोप तय करने पर चर्चा नहीं कर रहे थे। ट्रायल कोर्ट इस मामले में 9 सितंबर को तर्क पूरे करेगी। अदालत ने फिर कहा कि आवश्यक अनुमति केवल भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामलों में आवश्यक होगी, भारतीय दंड संहिता के तहत मामलों में नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। 7 अक्टूबर 2022 को सीबीआई ने नौकरियों के लिए जमीन मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती सहित 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। ट्रायल कोर्ट ने 25 फरवरी को सीबीआई द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट का नोटिस लिया। 7 जून 2024 को, सीबीआई ने इस मामले में अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल की, जिसमें 78 लोगों को आरोपी बनाया गया। इन 78 आरोपियों में 38 रेलवे नौकरी के उम्मीदवार शामिल हैं।