महिला उद्यमिता को मिलेगी नई उड़ान, बीआरटीपी-जीविका 3 को मंजूरी
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पटना, एक मार्च (एबीएन) राष्ट्रीय ग्रामीण जीविका मिशन और विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से पूर्व के परियोजनाओं को मजबूत करने के लिए, राज्य में "नया बिहार ग्रामीण परिवर्तन परियोजना (बीआरटीपी) - जीविका -3" को मंजूरी दी गई है। ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव पंकज कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि इस योजना को मंजूरी देने का उद्देश्य राज्य में उत्पादक क्षमता, आय और रोजगार के अवसरों को बढ़ाना और स्वयं सहायता समूह की उत्पादों को बढ़ाना है। इस परियोजना की अवधि छह वर्ष है जिस पर वित्तीय वर्ष 2027 से कार्य किया जाएगा। इसकी कुल लागत तीन हजार करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। विश्व बैंक कुल राशि का 70 प्रतिशत और राज्य सरकार 30 प्रतिशत वहन करेगी।
प्रधान सचिव ने कहा कि निर्धारित लक्ष्य के अनुसार कृषि उत्पादों, पशुओं और गैर-कृषि उत्पादों और सेवाओं के लिए बाजार विकास के साथ-साथ सार्वजनिक-निजी समुदाय मॉडल, मूल्य श्रृंखला बुनियादी ढांचे, ब्रांडिंग, विपणन, डिजिटल और वित्तीय ढांचे को बढ़ावा देने के लिए एक नई दिशा तैयार की जाएगी। इसके साथ ही उद्यमिता के विकास के लिए कई बुनियादी ढांचे तैयार किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बीआरटीपी-जीविका 3 में मुख्य फोकस परियोजना प्रबंधन है जिसमें स्वयं सहायता समुदाय संगठनों का विकास और मजबूती, आर्थिक क्लस्टर और उद्यमिता, विभिन्न क्षेत्रों के आर्थिक विकास के लिए डिजिटल और प्रौद्योगिकी प्रणाली हैं। उक्त कदमों के तहत बिहार में स्वयं सहायता समूहों, गांवों और क्लस्टर संगठनों के साथ उत्पादक कंपनियों की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। इसकी मदद से राज्य में सौर मार्ट, कृषि, वनस्पति, मछली पालन और गैर-कृषि आधारित उद्योगों, उद्यमियों और उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्य रूप से मछली पालन, डेयरी, पोल्ट्री, मछली और मधुमक्खी पालन व्यवसाय को एक नई पहचान मिलेगी।
प्रधान सचिव ने कहा कि इसके साथ ही सरकार राज्य में गैर-कृषि आधारित व्यावसायिक संस्थानों को बढ़ावा देने का भी план रखती है। परियोजना के तहत, गांव स्तर पर गोदाम, कोल्ड स्टोरेज, बीज संयंत्र, प्रसंस्करण इकाइयों, हैचरी, चिलिंग प्लांट्स के विकास के साथ बाजारों तक पहुंच के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया जाएगा। यह व्यापारियों को निजी क्षेत्र के भागीदारों के साथ मिलकर काम करने में सक्षम बनाएगा और उनकी उत्पादक क्षमता में अपेक्षित वृद्धि होगी।
प्रधान सचिव ने कहा कि बीआरटीपी-जीविका-3 के तहत कुल एक हजार क्लस्टर स्तर की संस्थाओं को स्वयं को सक्षम बनाने की तैयारी है। इससे छोटे उद्योगों और व्यवसाय से जुड़े परिवार आसानी से सामाजिक और वित्तीय सेवाएं प्राप्त कर सकेंगे। क्लस्टर स्तर की संस्था को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे लाभ का एक हिस्सा समुदाय सेवाओं में फिर से लगाएं। इससे समूह सदस्यों, ग्रामीण उद्यमियों और मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान सेवाओं को प्रोत्साहन मिलेगा।
इस संबंध में ग्रामीण विकास और परिवहन मंत्री श्री शरwan कुमार ने कहा कि बिहार ग्रामीण परिवर्तन परियोजना जीविका परिवारों और समूहों के विकास में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के लिए काम करेगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे और बड़े उद्योग और व्यवसाय मजबूत होंगे। हजारों, लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। विशेष रूप से महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में राज्य में एक नया रिकॉर्ड स्थापित होगा।