राज्यपाल के भाषण में हर ओर हरियाली लेकिन हकीकत इसके उलट : तेजस्वी यादव
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पटना, 2 फरवरी (एबीएन)। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान के अभिभाषण पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने गवर्नर के अभिभाषण को सरकार की ओर से "वही पुरानी बात" बताते हुए कहा कि इसमें कुछ नया नहीं है और यह जमीनी हकीकत से बहुत दूर है। तेजस्वी यादव ने कहा कि वे पिछले 10 वर्षों से सदन में हैं, इस दौरान चाहे जो भी गवर्नर पद पर रहा हो, सभी ने वही भाषण पढ़ा है जो सरकार ने दिया था। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि गवर्नर के अभिभाषण में हर जगह हरियाली और विकास का चित्रण होता है, लेकिन बिहार में वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाषण में जिन योजनाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें से अधिकांश योजनाएं हैं जो सत्ता में आने से पहले राष्ट्रीय जनता दल की योजनाओं से नकल की गई हैं। तेजस्वी ने कहा कि सरकार केवल कागज पर विकास दिखा रही है, जबकि आम लोग अभी भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। तेजस्वी यादव ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति कोई छिपी नहीं है। राज्य में हत्या, बलात्कार, लूट, अपहरण और फायरिंग जैसी घटनाएं नियमित रूप से हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अच्छी सरकार का दावा करती है, लेकिन वास्तव में अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाते हुए तेजस्वी ने कहा कि बिहार में कई सरकारी योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि ब्लॉक या थाना स्तर पर जाएं तो हर जगह भ्रष्टाचार साफ दिखाई देता है। आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए तेजस्वी यादव ने पूछा कि बिहार आर्थिक मोर्चे पर देश की सबसे खराब स्थिति वाला राज्य क्यों है? अगर बिहार ने वास्तव में विकास किया है तो अन्य राज्यों की तरह विकास क्यों नहीं कर रहा है? उन्होंने दावा किया कि बिहार लगभग हर क्षेत्र में पिछड़ रहा है और अगर यह सबसे आगे है तो भ्रष्टाचार और अपराध में। तेजस्वी यादव ने नेट छात्रा की मौत के मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के संबंध में सरकार के इरादों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे अनेक मामले हैं जो जांच के लिए सीबीआई को सौंपे गए हैं, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जब सरकार "न्याय के साथ विकास" की बात करती है, तो उसका रवैया और कार्य इसके बिल्कुल विपरीत है।