नेट छात्र की मौत का मामला : विधानसभा और परिषद में विपक्ष का प्रदर्शन
Awaz E Bihar••0 व्यूज़•3 मिनट पढ़ें
पटना, बिहार विधानसभा और परिषद के पोर्टिको पर विपक्ष ने नेट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत मामले में सीबीआई जांच को हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व सीपीआई (एमएल) के विधान परिषद सदस्य शशि यादव ने किया। प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के एक विधान परिषद सदस्य भी परिषद में मौजूद थे और उन्होंने प्रदर्शन का समर्थन किया।
विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि नेट छात्रा की मौत मामले में असली अपराधियों तक पहुंचने के बजाय पुलिस मृत छात्रा के परिवार को परेशान कर रही है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेताओं ने कहा कि बार-बार पूछताछ करके परिवार को मानसिक पीड़ा दी जा रही है। उनका कहना था कि पुलिस का रवैया संदिग्ध है और प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई है।
सीपीआई (एमएल) के विधान परिषद सदस्य शशि यादव ने कहा कि बिहार में लड़कियों के खिलाफ अपराधिक घटनाएं लगातार हो रही हैं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा के मामले और औरंगाबाद में चार लड़कियों की आत्महत्या के मामले का हवाला दिया।
शशि यादव ने कहा कि सरकार ने नेट छात्रा की मौत मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है, लेकिन केवल जांच एजेंसी को बदलने से न्याय सुनिश्चित नहीं होगा। उन्होंने मांग की कि सीबीआई की जांच हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी स्तर पर साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ न की जाए और अपराधियों को बचाने की कोशिश न की जाए। उन्होंने कहा कि न्यायिक निगरानी जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता को सुनिश्चित करेगी और प्रभावित परिवार को विश्वास दिलाएगी।
बिहार विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्षी सदस्यों ने हंगामा किया। उन्होंने विधानसभा पोर्टिको में नेट छात्रा मामले पर पोस्टर लगा रखे थे और सरकार के खिलाफ नारे लगाए। आरजेडी, कांग्रेस और वामपंथी दलों के सदस्यों ने सरकार से अपनी चुप्पी तोड़ने की मांग की। 25 सदस्यों ने सरकार से कानून व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। विपक्ष सरकार पर जांच में लापरवाही का आरोप लगा रहा है। अपराधियों को बचाने के आरोप भी हैं।
विपक्ष का कहना है कि पुलिस प्रशासन ने शुरुआती阶段 में इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को नजरअंदाज किया। समय पर आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई और इससे संदेह और गहरे हो गए हैं। जांच शुरू से ही निष्पक्षता और संवेदनशीलता से की जाती तो आज ऐसे प्रदर्शन की जरूरत नहीं पड़ती। विपक्ष ने मांग की कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले, न्यायिक निगरानी में सीबीआई जांच कराए और मृत छात्रा के परिवार को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।