परिषद में विपक्ष का हंगामा, अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों को पूरे दिन के लिए निलंबित कर दिया
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पटना : (एबीएन) बिहार विधान परिषद में मंगलवार को विपक्ष की ओर से एक और हंगामा देखने को मिला। स्थिति यहां तक बिगड़ गई कि सत्तारूढ़ दल के सदस्यों ने कथित तौर पर विपक्षी सदस्यों पर अपशब्दों का प्रयोग करने का आरोप लगाया। जैसे ही सदन शुरू हुआ, आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह और मंत्री अशोक चौधरी के बीच अपशब्द सुनने को मिले। आरजेडी के एमएलसी सुनील कुमार सिंह समेत पूरा विपक्ष वेल में आ गया और नीतीश सरकार के खिलाफ नारे लगाने लगे। अध्यक्ष ने उन्हें समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। इसके बाद अध्यक्ष ने विपक्ष के सभी एमएलसी को पूरे दिन की कार्यवाही के लिए सदन से बाहर निकाल दिया। इसके बाद आरजेडी एमएलसी ने फिर से धरना शुरू कर दिया। उन्होंने 'अशोक चौधरी होश में आओ' के नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद अध्यक्ष ने मार्शलों को भी सदन में बुलाया ताकि एमएलसी को बाहर फेंका जा सके। इसके बाद सभी एमएलसी चले गए। बिहार विधान परिषद में आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह और जेडीयू कोटे के मंत्री अशोक चौधरी के बीच गरमागरम बहस हुई। आरजेडी एमएलसी सुनील सिंह ने सीएम नीतीश कुमार के रवैये का मुद्दा उठाया और कहा कि उन्हें सदन में माफी मांगनी चाहिए। इसी दौरान अशोक चौधरी ने इसका विरोध किया और कुछ कहने की कोशिश की। इसके बाद एमएलसी सुनील सिंह ने कहा कि यह तानाशाही नहीं चलेगी। विपक्ष को सदन में बोलने नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। अध्यक्ष ने पहले हंगामा आराई करने वाले नेताओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं माने तो उन्हें बाहर जाने को कहा। विधान परिषद की कार्यवाही शुरू होने से पहले आरजेडी एमएलसी ने धरना शुरू कर दिया। सभी नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की मांग की। आरजेडी एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दीकी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को सदन में जिस तरह का बर्ताव किया, उससे यह स्पष्ट हो गया कि वे अपने होश में नहीं हैं। वे बीमार थे। उन्होंने विपक्षी नेता राबड़ी देवी के साथ जो सलूक किया, वह गलत था। जनता ने यह सब देखा। अब उन्हें पद छोड़ देना चाहिए। मंत्री दिलीप जैसवाल ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिस तरह से विपक्षी नेता ने दलित समुदाय के एक मंत्री के साथ दुर्व्यवहार किया, वह अत्यधिक निंदनीय है। उन्होंने कहा कि वे सदन में मौजूद थे और अपने कान से घटना को सुना और देखा। दिलीप जैसवाल ने आरोप लगाया कि गुस्से में आकर विपक्षी नेता ने मंत्री के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया, जिसे वे माइक्रोफोन पर भी नहीं दोहरा सकते। उन्होंने कहा कि यह दलित समुदाय से संबंधित एक मंत्री का अपमान है और ऐसा व्यवहार किसी भी स्थिति में अस्वीकार्य है। मंत्री ने मांग की कि संबंधित नेता अपने व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और जब तक वे ऐसा नहीं करते, उन्हें सदन में आने की अनुमति नहीं दी जाए। उन्होंने कहा कि विधानसभा एक लोकतांत्रिक स्थान है, गाली-गलौज का मंच नहीं। दिलीप जैसवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि विपक्षी नेता अपनी सीट से उठे, मंत्री के पास पहुंचे और उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जबकि पूरा सदन देखता रहा। उन्होंने कहा कि यह सही नहीं है और केवल सदन से वॉकआउट करना समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाए, वीडियो फुटेज मांगी जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।