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ज़कात समाज के आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है: आमिर सब्हानी
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ज़कात समाज के आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है: आमिर सब्हानी

Awaz E Bihar•15 फ़रवरी 2026 को 03:27 pm बजे•0 व्यूज़•4 मिनट पढ़ें

ज़कात के सिस्टम को सामूहिक रूप से अभियान चलाकर लागू किया जाए: रज़वान अहमद इस्लाही

पटना: ज़कात सेंटर इंडिया के पटना चैप्टर द्वारा आज एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में ज़कात सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसका उद्घाटन पटना जंक्शन के इमाम और खतीब मौलाना असद कासमी ने कुरआन की तिलावत से किया। इसके बाद इस्लामी धर्म की एक मूलभूत इबादत और पांच अरकान में महत्वपूर्ण अरकान ज़कात पर जमात इस्लामी हिंद बिहार के अमीर रिजवान अहमद इस्लाही ने अपने संबोधन में कहा कि जिस तरह से मस्जिदों में और इमाम अपने संबोधन में नमाज, हज, रोजा पर संबोधन करते हैं और इस्लाम की रूह से इसकी महत्ता मुस्लिम उम्मा तक पहुंचाते हैं, उसी तरह अब ज़कात के सिस्टम को लागू करने के लिए भी सामूहिक रूप से आंदोलन चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुरआन की शुरुआत में ही लिखा गया है कि तुम तब तक पूरे ईमान वाले नहीं बन सकते जब तक कि अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च नहीं करो। मनुष्य अपना प्रिय माल खर्च किए बिना नेक नहीं बन सकता, यानी जिसके दिल में या तो अल्लाह की मोहब्बत होगी या माल की मोहब्बत।

मौलाना रिजवान अहमद इस्लाही ने कहा कि ज़कात न देने वाला मुशरिक है। ज़कात फर्ज सदका है। लेकिन इस जगह सदका को फर्ज के रूप में माना गया है जिसे ज़कात कहते हैं। सदकात वास्तव में फकीरों और मिस्कीनों के लिए है और उन लोगों के लिए जो सदकात के काम पर मामूर हैं। उन्होंने कहा कि ज़कात के सिस्टम को स्थापित करने के लिए सामूहिक रूप से आंदोलन चलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों की ऐसी सोच बन गई है कि वे ज़कात तो देते हैं लेकिन इसके लिए ज़कात का फर्ज अदा नहीं होता है। ज़कात को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए जागरूकता लाने की जरूरत है। जिसके लिए मैं ज़कात सेंटर इंडिया की कोशिशों और मेहनत की प्रशंसा करता हूं जो कम संसाधनों के बावजूद भी लगभग ढाई साल में लगभग 54 लाख रुपये जरूरतमंदों तक पहुंचाया है। यह बहुत अच्छा कदम है और अल्लाह के बताए गए तरीकों से मुस्तहिक तक पहुंचाया है।

वहीं मेहमान के रूप में पूर्व मुख्य सचिव आमिर सुभानी ने कहा कि ज़कात की इस्लाम में सामूहिकता की बहुत बड़ी महत्ता है। ज़कात में भी सामूहिकता होनी चाहिए। इसकी महत्ता से इनकार नहीं किया जा सकता है। ज़कात सेंटर के लोग प्रशंसनीय हैं। किसी भी समाज में अमीर और गरीब बराबर नहीं हो सकते लेकिन थोड़ा सा बराबरी का हक देने से समाज का एक वर्ग ऊपर उठ सकता है। उन्होंने कहा कि ज़कात समाज के आर्थिक, सामाजिक सुरक्षा की गारंटी है। यूरोपीय देशों में, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका में भी छात्रों के लिए अलग सिस्टम है जो आर्थिक कमजोरी से पढ़ाई नहीं कर पाते, इस सामूहिक सिस्टम में जो बहुत सारी महत्ता का हامل है, जो आप व्यक्तिगत रूप से नहीं कर सकते, इसमें पारदर्शिता दिखनी चाहिए। ऐसे गरीबों की मदद जरूरी है जो इसके हकदार हैं। उन्होंने ज़कात सेंटर से अपनी संबंधता का इज़हार किया।

ज़कात सम्मेलन की अध्यक्षता क़मर वारसी, खजांची, ज़कात सेंटर पटना कर रहे थे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि पूरे बिहार में ज़कात के दो सेंटर काम कर रहे हैं जहां गरीबों की कफालत की जा रही है। इसके बाद एसएस कादरी, चार्टर्ड अकाउंटेंट, अध्यक्ष ज़कात सेंटर इंडिया पटना चैप्टर ने अपने संबोधन में कहा कि ज़कात सेंटर पटना अपने उद्देश्यों में गामज़न है और ज़कात के सिस्टम को स्थापित करने में एक क्रांतिकारी आंदोलन की तरह काम कर रहा है। हकदार तक पहुंच और उनकी ज़कात की रकम को जरूरतमंदों तक पहुंचाना हमारा विशेष उद्देश्य है।

दिल्ली से आए ज़कात सेंटर इंडिया के ट्रस्टी और इस्लामिक अकादमी दिल्ली के निदेशक डॉक्टर रिजवान अहमद रफीकी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि जो लोग ज़कात अदा नहीं करते हैं उनके बारे में कुरआन कहता है कि उन्हें दुखदायी सजा दी जाएगी। एक दिन आएगा कि सोने और चांदी पर जहन्नम की आग दहकाई जाएगी, अल्लाह पूछेगा कि जो माल दिया वह कहां खर्च किया। उन्होंने बताया कि भारत में 11 परिवारों के पास देश का 40 प्रतिशत धन है। यह रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इस्लाम ने पहले ही दौर में ही ऐसे समाज का निर्माण किया जहां ज़कात लेने वाला कोई नहीं था। उन्होंने कहा कि सामूहिक ज़कात का सिस्टम मिल्लत में गरीबी उन्मूलन, शैक्षिक प्रगति और आर्थिक सुधार को रोकने में प्रभावी साधन है।

ज़कात सेंटर के सचिव एडवोकेट मोहम्मद नोशाद ने पावर पॉइंट के माध्यम से वर्ष 2025 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि ज़कात सेंटर का उद्देश्य ज़कात का सामूहिक सिस्टम स्थापित करके समाज में समृद्धि लाना है, ताकि आज ज़कात लेने वाले कल ज़कात देने वाले बनें। पिछले वर्ष के व्यय की विस्तृत जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि चार चरणों में जरूरतमंद लोगों के बीच लगभग
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